सत्यानंद योग आश्रम में रासेयो के सात दिवसीय विशेष शिविर का गरिमामय समापन, स्वयंसेवकों को सेवा, अनुशासन और योग का दिया संदेश
राजनांदगांव। युवाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त समाज की कल्पना करना संभव नहीं है। युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं। युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए। यह बात पूर्व उपाध्यक्ष कृषि उपज मंडी राजनांदगांव कोमल सिंह राजपूत ने शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (रासेयो) इकाई द्वारा आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही।
शासकीय शिवनाथ विज्ञान महाविद्यालय, राजनांदगांव की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा

आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन 2 नवंबर 2026 को सत्यानंद योग आश्रम में गरिमामय वातावरण में हुआ। शिविर की मुख्य थीम ‘नशामुक्त भारत के लिए युवा’ रखी गई थी। सात दिनों तक चले इस विशेष शिविर में स्वयंसेवकों ने सेवा, अनुशासन, योग, श्रमदान और सामाजिक जागरूकता से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझा।
समापन समारोह में रासेयो कार्यक्रम अधिकारी डॉ. एस.आर. कन्नौजे ने सात दिवसीय शिविर के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने शिविर के उद्देश्यों, स्वयंसेवकों की सहभागिता और नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए किए गए जागरूकता प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के शिविर विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता, सहयोग और सेवा भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मुख्य अतिथि कोमल सिंह राजपूत ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन शिविरों में स्वयंसेवक अनुशासन, सामूहिकता, सहयोग और निस्वार्थ सेवा का महत्व सीखते हैं। शिविर के दौरान प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों के जीवन में लंबे समय तक उपयोगी साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि आज समाज में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति एक गंभीर चिंता का विषय है। इसका सबसे अधिक प्रभाव युवा पीढ़ी पर पड़ता है। ऐसे में युवाओं को स्वयं नशे से दूर रहकर दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों से राष्ट्र और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष रवि सिन्हा ने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन जीने की एक प्रभावी पद्धति है। योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन और संतुलन स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना से जुड़कर विद्यार्थियों को समाज की वास्तविक समस्याओं को समझने और उनके समाधान में योगदान देने का अवसर मिलता है। नशामुक्ति अभियान में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्वयंसेवकों से आग्रह किया कि शिविर के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभव को केवल सात दिनों तक सीमित न रखें, बल्कि अपने घर, मोहल्ले और आसपास के क्षेत्रों में भी नशामुक्ति एवं योग का संदेश पहुंचाएं।
महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. ए.एन. माखीजा ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत स्वयं से होती है। यदि युवा स्वयं नशे से दूर रहने का संकल्प लें, तो वे अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है। इसलिए युवाओं को जागरूक नागरिक बनकर नशामुक्त समाज के निर्माण में सहयोग करना चाहिए।
सत्यानंद योग आश्रम की अध्यक्ष तारिणी मिरानी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सेवा भावना के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रमदान और योग व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करते हैं। विद्यार्थियों को अपने दैनिक जीवन में योग और सेवा को स्थान देना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों को शिविर के दौरान सीखी गई अच्छी आदतों को निरंतर अपनाने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर कोमल साहू ने शांति पाठ कराया। उन्होंने स्वयंसेवकों से शिविर समाप्त होने के बाद भी प्रतिदिन योग करने और अपने परिवार, मित्रों तथा समाज के लोगों को योग के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नियमित योगाभ्यास से जीवन में सकारात्मकता, शांति और अनुशासन का विकास होता है।
समापन अवसर पर सत्यानंद योग आश्रम की ओर से सभी स्वयंसेवकों को साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया। इससे विद्यार्थियों में अध्ययन और सकारात्मक विचारों के प्रति रुचि बढ़ाने का संदेश दिया गया।
सात दिवसीय विशेष शिविर के समापन पर स्वयंसेवकों में उत्साह और सेवा भावना देखने को मिली। शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह समझा कि नशामुक्त भारत का निर्माण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। कार्यक्रम ने स्वयंसेवकों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता फैलाने और राष्ट्र निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लेने की प्रेरणा दी।

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