
राजनांदगांव (इंदिरा नगर): अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर इंदिरा नगर स्थित वृंदावन कॉलोनी की महिलाओं ने राधा-कृष्ण मंदिर प्रांगण में पारंपरिक अंदाज़ में गुड्डा-गुड़िया की शादी रचाई। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा रहा, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मेल-जोल का एक जीवंत उदाहरण भी बना।

इस विशेष आयोजन में कॉलोनी की महिलाओं ने पारंपरिक परि। विवाह की पूरी रस्में विधिपूर्वक निभाई गईं—मंडप सजाया गया, जयमाल की रस्म हुई, मंगल फेरों के प्रतीकात्मक स्वरूप में गुड्डा-गुड़िया को घुमाया गया और मिठाइयों का वितरण कर सबने इस मांगलिक कार्यक्रम को सफल बनाया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, डोलक की थाप पर भजन गाए और पूरे माहौल को भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना दिया।

यह परंपरा हर वर्ष अक्षय तृतीया के दिन निभाई जाती है, ताकि नई पीढ़ी को हमारी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं से जोड़कर रखा जा सके। उन्होंने कहा, “गुड़िया-गुड़िया की यह शादी प्रतीकात्मक होती है, लेकिन इसमें जो भावनाएं, मिलन और संस्कार हैं, वे हमें हमारी संस्कृति की गहराइयों से जोड़ते हैं।”
अक्षय तृतीया हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है और इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है—इस दिन बिना किसी ज्योतिषीय गणना के शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए इस दिन गुड्डा-गुड़िया का विवाह आयोजित किया गया, जिससे पारिवारिक और सामाजिक समरसता को बल मिला।
तस्वीरों में महिलाएं सामूहिक रूप से बैठी हुई हैं, बीच में गुड्डा-गुड़िया के विवाह की सजावट की गई है। संगीत वाद्य यंत्र जैसे डोलक और मंजीरे भी कार्यक्रम में शामिल रहे। कुछ महिलाओं ने बच्चों के साथ आकर इस आयोजन को और भी आनंदमय बना दिया।
इस आयोजन को सफल बनाने में कु मिशका डागा, श्री मति चमेली जैनश्री मति वैशाली जैन,श्री मति नीतू गुप्ता,श्री मति आकांक्षा जैन,श्री मति गीतिका,श्री मति मोनिका, सुश्री आरती गुप्ता,श्री मति प्रियंका जैन श्री मति रूपा गुप्ता,श्री मति प्रिया सोनी,आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।इस कार्यक्रम के माध्यम से वृंदावन कॉलोनी की महिलाओं ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक परंपराएं यदि समूह में मिलकर मनाई जाएं तो न केवल उनमें आनंद आता है बल्कि समाज में एकता और भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है।

