शासकीय जिला अस्पताल बसन्तपुर राजनांदगांव में राष्ट्रगान की अनूठी परंपरा: चिकित्सकों और स्टाफ की राष्ट्रभक्ति मिसाल बनी

राजनांदगांव (छ.ग.)। सेवा और राष्ट्रभक्ति का जब सुंदर संगम होता है, तब समाज को एक नई दिशा मिलती है। कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है छत्तीसगढ़ के शासकीय जिला अस्पताल , बसन्तपुर, राजनांदगांव में, जहां प्रत्येक दिन कार्य प्रारंभ होने से पहले चिकित्सकों सहित पूरा मेडिकल स्टाफ मिलकर राष्ट्रगान करता है। यह पहल ना केवल प्रेरणादायक है, बल्कि अस्पताल की कार्यसंस्कृति को भी एक नया आयाम दे रही है।

हर सुबह अस्पताल के मुख्य भवन में डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी और प्रशासनिक स्टाफ निर्धारित समय पर एकत्रित होते हैं और पूरे सम्मान व अनुशासन के साथ राष्ट्रगान करते हैं। यह दृश्य अपने आप में बहुत अनुशासित और भावनात्मक होता है, जिसे देखकर कोई भी गर्व से भर उठे।

इसका उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं था, बल्कि एक सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना और कर्मचारियों में एकता, अनुशासन व देशभक्ति की भावना को मजबूत करना था। अस्पताल के अधीक्षक ने बताया कि जबसे यह परंपरा शुरू हुई है, कर्मचारियों के व्यवहार और समर्पण में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।

न केवल कर्मचारियों में, बल्कि अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी यह परंपरा चर्चा का विषय बन गई है। लोग कहते हैं कि यह देखकर उन्हें अस्पताल में एक भरोसे और सम्मान का भाव महसूस होता है। मरीजों का कहना है कि जब वे डॉक्टरों को राष्ट्रगान करते देखते हैं, तो उन्हें यह एहसास होता है कि वे एक ऐसे संस्थान में हैं जहां न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जाता है।

अस्पताल की यह पहल अन्य संस्थानों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। जब कार्यस्थल पर दिन की शुरुआत राष्ट्रगान जैसे पवित्र भाव से हो, तो न केवल कर्म की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि सहयोग की भावना भी मजबूत होती है।

चिकित्सा जैसे सेवा प्रधान क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए यह परंपरा एक भावनात्मक जुड़ाव का माध्यम बन रही है। डॉक्टर और स्टाफ स्वयं भी मानते हैं कि राष्ट्रगान उन्हें प्रतिदिन अपने दायित्वों की याद दिलाता है और कार्य के प्रति गंभीरता को बढ़ाता है।

शासकीय जिला अस्पताल बसन्तपुर, राजनांदगांव की यह राष्ट्रगान परंपरा आज के समय में एक प्रेरणादायक पहल है, जो यह बताती है कि देशसेवा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि हर उस स्थान पर की जा सकती है जहां समर्पण और जिम्मेदारी हो।

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