पटवारी की मनमानी से परेशान हितग्राही, नहीं खुल रहा कार्यालय – शासन को लग रही राजस्व में चपत

आमाबेड़ा,तहसील-अंतागढ़, जिला कांकेर(छत्तीसगढ़)।
ग्रामीण अंचलों में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए हितग्राही जहाँ दिनभर चक्कर काट रहे हैं, वहीं पटवारी की लापरवाही और गैरहाजिरी से न केवल आम जनता परेशान है, बल्कि शासन को भी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

अंतागढ़ तहसील के अंतर्गत ग्राम सेला, दुर्गांव, टुकगांव, बौछापारा जैसे क्षेत्रों के कई ग्रामीणों ने शिकायत की है कि पटवारी अनप्रकाश सेला द्वारा काम में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। न तो पटवारी कार्यालय समय पर खुलता है और न ही किसानों की ज़रूरतों से जुड़ा कोई कार्य समय पर हो रहा है। इस वजह से हितग्राहियों को राजस्व कार्यों के लिए कई-कई बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

ग्राम बौछापारा के किसान लखू राम, सराधू राम, दिसराम और मानक राम ने बताया कि उन्हें अपने नाम से किसान कार्ड, भूमि अभिलेख, नामांतरण और सीमांकन से जुड़े कार्य करवाने थे, परंतु पटवारी के कार्यालय पर बार-बार जाने के बावजूद न तो कोई जवाब मिल रहा है और न ही कोई काम हो पा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी न तो ग्राम पंचायत में आते हैं और न ही कॉल पर सही जवाब देते हैं। मोबाइल नंबर पर भी संपर्क करने पर कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिलती। ऐसे में ग्रामीणों का कीमती समय और श्रम व्यर्थ जा रहा है।

इन परिस्थितियों में शासन की योजनाओं और सब्सिडी का लाभ भी समय पर नहीं मिल पा रहा, जिससे किसान आर्थिक रूप से और अधिक संकट में आ रहे हैं। इसके अलावा भूमि से जुड़े दस्तावेज़ों की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण शासन को भी राजस्व की हानि हो रही है, क्योंकि नामांतरण, नक्शा, खसरा और सीमांकन जैसे कार्यों से जुड़ी फ़ीस वसूली नहीं हो पा रही।

हितग्राहियों ने जिलाधिकारी और तहसील प्रशासन से अपील की है कि पटवारी की कार्यशैली की जाँच कर सख़्त कार्रवाई की जाए ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और शासन की योजनाएँ समय पर ज़मीन पर उतर सकें।

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