
कांकेर ज़िले के अंतागढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम तुमासनार में एक महत्वपूर्ण किसान संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रीय किसानों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस संगोष्ठी में कृषि, शिक्षा, सामाजिक अधिकारों और संविधान की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कृषि विशेषज्ञ शिवशंकर सिंह, भारतीय किसान यूनियन के विधिक सलाहकार महेंद्र कुमार साहू, अधिवक्ता गोपाल सोनी, महिला एवं बाल अधिकारों की सलाहकार अधिवक्ता संतोषी सलामे, अधिवक्ता कुणाल भंसाली, गौमाता सेवा आर्मी के अध्यक्ष कुंदन सोनी, संरक्षक शिवम चौधरी, एवं प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष खोबरागड़े उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में जिले के 40 से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें राजेश्वर कांगे, मेघनाथ उइके, महेंद्र बघेल, सामशाय सलामे, राजकुमार दुग्गा, अंशु मंडावी, सुशील कुमार, जैनूराम कुंजाम समेत अनेक गणमान्य लोग सम्मिलित थे।
शिवशंकर सिंह ने अपने उद्बोधन में इतिहास से जुड़ी क्रांतिकारी विरासत की याद दिलाते हुए कहा कि “हमारी धरती वह है जहाँ अंग्रेज शासन नहीं कर पाए, लेकिन आज की नीतियाँ किसानों की आजीविका को खत्म करने की ओर अग्रसर हैं।”
उन्होंने शिक्षा की अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि “कलम की ताकत से ही हम अपने अधिकारों की रक्षा कर सकते हैं। संविधान पढ़ना और समझना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।”
गौमाता सेवा आर्मी के अध्यक्ष कुंदन सोनी ने कहा कि “पशुपालन, कुटीर उद्योग और स्वदेशी उत्पादों के निर्माण से ही किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। सरकार की योजनाएँ अमीरों को सब्सिडी देती हैं, पर गरीब किसानों तक उसका लाभ नहीं पहुंच पाता।”
संगोष्ठी में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रत्येक गांव में ‘किसान भवन’ की स्थापना की जाएगी, जहां किसानों को वित्तीय सहायता, ट्रेनिंग एवं कानूनी परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।
विशेष रूप से यह उल्लेखनीय रहा कि कार्यक्रम में संविधान संरक्षण, आरक्षण नीति, रोजगार के अवसर और शिक्षा के निजीकरण पर गंभीर विमर्श हुआ। संगोष्ठी में वक्ताओं ने एक स्वर में शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय और रोजगार के क्षेत्र में समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में ऊर्जा से भरपूर जयकारा और ग्राम तरसानर के आयोजकों का अभिनंदन कर संगोष्ठी का समापन हुआ।
