
राजनांदगांव।
देश की माननीय राष्ट्रपति Droupadi Murmu के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर भारतीय जनता पार्टी में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इसी क्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध बताया है।
भाजपा जिला अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत ने जारी बयान में कहा कि राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक होती हैं और उनके पद की गरिमा सर्वोच्च होती है। ऐसे में किसी भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि, विशेषकर किसी राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू केवल देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन नहीं हैं, बल्कि वे आदिवासी समाज की गौरवशाली पहचान भी हैं। ऐसे में उनके प्रति किसी भी तरह की अपमानजनक टिप्पणी पूरे देश और विशेष रूप से आदिवासी समाज की भावनाओं को आहत करने वाली है।
कोमल सिंह राजपूत ने कहा कि भारत का संविधान सभी संवैधानिक पदों को विशेष सम्मान प्रदान करता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन पदों की गरिमा बनाए रखना हर राजनीतिक दल और जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है। राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है और लोकतंत्र में विभिन्न विचारधाराओं के बीच मतभेद भी होते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाए।
उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को सर्वोपरि मानती है। पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता और पदाधिकारी देश की संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की टिप्पणी से देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को आघात पहुंचता है और इससे राजनीतिक संवाद की मर्यादा भी प्रभावित होती है।
भाजपा जिला अध्यक्ष ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि देश की जनता और राष्ट्रपति पद की गरिमा का सम्मान करते हुए उन्हें अपने शब्दों पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति के प्रति सम्मान बनाए रखना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का कर्तव्य है।
कोमल सिंह राजपूत ने आगे कहा कि भाजपा इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नजरिए से नहीं देखती, बल्कि इसे देश की संवैधानिक मर्यादा और राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा विषय मानती है। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक परंपरा और संविधान की गरिमा को बनाए रखने के लिए सभी राजनीतिक दलों को संयमित भाषा और जिम्मेदार व्यवहार का परिचय देना चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि राष्ट्रपति पद पूरे देश की एकता, सम्मान और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है। ऐसे पद के प्रति किसी भी प्रकार की असम्मानजनक टिप्पणी लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
