संजीवनी हॉस्पिटल पर फिर उठा सवाल: इलाज के दौरान युवक की मौत, लापरवाही के आरोप

राजनांदगांव। शहर के संजीवनी हॉस्पिटल पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। अस्पताल में इलाज के दौरान एक युवक की मौत होने के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। मृतक की पहचान आदित्य उर्फ सोनू रामटेके (35 वर्ष) के रूप में हुई है, जो स्टेशन पारा शिक्षक नगर, राजनांदगांव के निवासी थे। बताया जा रहा है कि उन्हें तबीयत खराब होने पर इलाज के लिए संजीवनी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, लेकिन मात्र चार घंटे के इलाज के भीतर ही उनकी मौत हो गई।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों की गंभीर लापरवाही के कारण युवक की जान चली गई। उनका कहना है कि समय पर सही इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता नहीं होने के कारण स्थिति बिगड़ती चली गई। मृतक के परिजनों और परिचितों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं थे, फिर भी मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है।
इस घटना के बाद संजीवनी हॉस्पिटल की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस अस्पताल के खिलाफ पहले भी कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। आरोप है कि यहां कई बार बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के इलाज किया जाता है, जिससे मरीजों की जान खतरे में पड़ती है। इसके बावजूद अब तक अस्पताल के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
मामले को लेकर फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश  अध्यक्ष  शिव शंकर सिंह गौर ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। यदि अस्पताल में पर्याप्त सुविधा और योग्य डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं, तो वहां मरीजों का इलाज करना सीधा-सीधा लोगों की जान से खिलवाड़ है। उन्होंने आरोप लगाया कि संजीवनी हॉस्पिटल को कुछ बड़े अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसकी वजह से बार-बार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पा रही है।


प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी इस मुद्दे को लेकर उग्र आंदोलन करेगी और दुर्ग संभाग के कमिश्नर से इसकी औपचारिक शिकायत भी की जाएगी।
इधर लोगों ने जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवरत्न की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल के खिलाफ लगातार शिकायतें आने के बावजूद अब तक कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया है, जो जांच का विषय है।
फिलहाल इस घटना के बाद शहर में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अस्पताल की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

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