
इन्दामरा।
रंगों के पावन पर्व होली के शुभ अवसर पर क्षेत्र के साहित्यप्रेमी एवं कवि परमानंद वर्मा (इन्दामरा) ने अपनी भावपूर्ण कविताओं के माध्यम से समस्त क्षेत्रवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने जीवन के सत्य, प्रेम, प्रतीक्षा और अपनत्व को अपनी पंक्तियों में सजीव रूप से प्रस्तुत किया है।
✍️ कविता
उगते सूरज को कोई प्रणाम नहीं करते
फिर भी सूरज कभी आराम नहीं करते
सब अपने ही है इस दुनिया में
अपनों को यू कोई बदनाम नहीं करते
सदा सत्य बोलो ऐसा गुरु मंत्र हैं
क्योंकि होली के दिन छिपकर कोई आराम नहीं करते
सजना तुम पत्र ✉️ क्यों नहीं लिखे
वर्ष बीते
मास बीते
ईद की चांद हो गई
एक बार क्यों नहीं दिखे
सजना तुम पत्र ✉️क्यों नहीं लिखे
तुम बिन सजना होली लगे फिके
सजना तुम पत्र✉️ क्यों नहीं लिखे
अब कोई बहाना 廊नहीं होगी
तुम्हें मेरी प्यार की कसम
अब तुम्हें आना होगा
नहीं आए तो यही समझूंगी
विदेश जाकर यही सब सीखे
सजना तुम पत्र✉️ क्यों नहीं लिखे
तुम बिन सजना होली लगे फीके
सजना तुम पत्र ✉️क्यों नहीं लिखे
✍️✍️✍️✍️
— परमानंद वर्मा, इन्दामरा
कवि ने अपनी पंक्तियों के माध्यम से समाज को सत्य, प्रेम और अपनत्व का संदेश दिया है। होली के रंगों में भी प्रियजन की अनुपस्थिति का भाव बड़ी सहजता से व्यक्त किया गया है।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि होली को भाईचारे, सौहार्द और सद्भाव के साथ मनाएँ तथा मन के विकारों को त्यागकर प्रेम के रंग में रंग जाएँ।
