राजनांदगांव किसान सम्मेलन में अव्यवस्था पर विपक्ष का हमला, जवाबदेही तय करने की मांग


राजनांदगांव। जिले के ऑडिटोरियम में आयोजित कृषक उन्नति योजना अंतर्गत आदान सहायता राशि वितरण समारोह के दौरान हुई अव्यवस्था को लेकर सियासत गरमा गई है। कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री राम विचार नेताम का भाषण चल रहा था, उसी बीच हॉल की कुर्सियां खाली होने लगीं और बड़ी संख्या में किसान बाहर निकल गए। बाहर भोजन शुरू होने की सूचना मिलते ही किसान हॉल से बाहर पहुंचे, जिससे आयोजन की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह गौर और महासचिव परमानंद वर्मा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि किसानों के सम्मान के नाम पर आयोजित कार्यक्रम में इस तरह की अव्यवस्था सरकार और प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाती है।
शिव शंकर सिंह गौर ने कहा कि जब मंत्री और जनप्रतिनिधि मंच पर मौजूद थे, तब भी किसानों के बैठने, भोजन व्यवस्था और कार्यक्रम के संचालन में इतनी बड़ी लापरवाही होना गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल दिखावे के कार्यक्रम कर रही है, जबकि किसानों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

परमानंद वर्मा ने कहा कि किसानों को पहले भाषण सुनने के लिए बुलाया गया और फिर भोजन के लिए लाइन लगने पर खाना बंद कर वापस हॉल भेजना किसानों का अपमान है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन सही तरीके से कार्यक्रम का प्रबंधन नहीं कर सकता, तो ऐसे आयोजनों पर करोड़ों खर्च करने का कोई औचित्य नहीं है।
दोनों नेताओं ने मांग की कि कार्यक्रम की पूरी जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसानों से जुड़े कार्यक्रमों में पहले उनकी सुविधाओं और सम्मान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक मंच तैयार किए जाएं।
इधर, जिले के कई किसान नेताओं ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि वे दूर-दराज गांवों से उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन उन्हें अव्यवस्था और अपमान का सामना करना पड़ा। किसानों ने कहा कि यदि सरकार सच में उनकी चिंता करती है, तो उन्हें सम्मानजनक तरीके से बुलाया और सुना जाना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की प्रशासनिक विफलता बताते हुए विधानसभा में मुद्दा उठाने की चेतावनी दी है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में किसानों के कार्यक्रमों की व्यवस्था बेहतर हो पाती है या नहीं।

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