छत्तीसगढ़ बजट पर शिवशंकर सिंह का हमला, कहा—जनता तक पहुँचना नेताओं और अफसरों की नीयत पर निर्भर

राजनांदगांव/छत्तीसगढ़।
फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने छत्तीसगढ़ के हालिया बजट को लेकर कांग्रेस और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बजट कितना भी अच्छा क्यों न हो, लेकिन उसका असली असर जनता तक पहुँचेगा या नहीं, यह सत्ता और प्रशासन में बैठे लोगों की नीयत और ईमानदारी पर निर्भर करता है।
सिंह ने आरोप लगाया कि पिछले कई दशकों के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं और बजट का बड़ा हिस्सा जमीन तक नहीं पहुँच पाता। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण योजनाएं फाइलों में सिमटकर रह जाती हैं और जनता को उसका पूरा लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा कि जब तक राजनीतिक दलों और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक किसी भी बजट से आम लोगों की स्थिति में बड़ा बदलाव आना मुश्किल है।
उन्होंने सीधे तौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद दोनों दलों के नेता जनता के हितों की जगह अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं। सिंह ने कहा कि “जनता की योजनाओं का पैसा नेताओं और अधिकारियों के बड़े पेट में समा जाता है, जिससे गरीब और जरूरतमंद लोगों तक योजनाओं का पूरा लाभ नहीं पहुँच पाता।”
सिंह ने यह भी कहा कि राज्य की कई योजनाओं में पारदर्शिता की कमी है और निगरानी व्यवस्था कमजोर है। उन्होंने मांग की कि सरकार सभी योजनाओं और बजट खर्च की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराए और समय-समय पर सोशल ऑडिट कराए, ताकि जनता खुद देख सके कि उनके लिए घोषित योजनाओं का पैसा कहाँ खर्च हो रहा है।
उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में कुछ बड़े अधिकारी ही फैसले लेते हैं, जिससे जमीनी स्तर की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। सिंह के अनुसार, बजट तभी सफल माना जाएगा जब किसानों, मजदूरों, युवाओं और गरीब परिवारों की आय और सुविधाओं में वास्तविक सुधार दिखाई देगा।
इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बजट पर उठ रहे सवालों का जवाब सरकार को अपने काम और नतीजों से देना होगा। आम जनता भी अब यह देखना चाहती है कि बजट की घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रहती हैं या वास्तव में गांव-गांव तक पहुंचती हैं।
आने वाले महीनों में बजट योजनाओं के क्रियान्वयन से ही तय होगा कि छत्तीसगढ़ का यह बजट जनता के जीवन में बदलाव लाता है या नहीं। फिलहाल, सिंह के बयान ने राज्य की राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है और सरकार के सामने पारदर्शिता और जवाबदेही साबित करने की चुनौती खड़ी कर दी है।

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