फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह गौर ने निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की मांग को लेकर दिया लिखित आवेदन

राजनांदगांव। जिले में निजी अस्पतालों की कथित लापरवाही और प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी ने जिले के कुछ अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत भेजी है। पार्टी ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर संचालित अस्पताल आम जनता की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन समय पर कार्रवाई नहीं कर रहा।
प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह गौर ने आरोप लगाया कि जिले में कई मल्टीस्पेशलिस्ट अस्पताल और जांच केंद्र बिना पर्याप्त संसाधनों और योग्य डॉक्टरों के संचालित हो रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से संजीवनी हॉस्पिटल, राघव वर्मा और विधि डायग्नोस्टिक सेंटर का नाम लेते हुए कहा कि इन संस्थानों की लापरवाही के कारण 16 फरवरी 2026 को ग्राम मेरेगांव चौकी निवासी लोकेश साहू (30 वर्ष) की मौत हो गई। उन्होंने दावा किया कि यदि पहले की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती, तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी।


पार्टी का कहना है कि जिले में कुछ अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों को राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण वे नियमों का उल्लंघन करते हुए मरीजों से मनमानी फीस वसूल रहे हैं और इलाज में लापरवाही बरत रहे हैं। शिवशंकर सिंह ने कहा कि लगातार आवेदन और शिकायत देने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन द्वारा कोई ठोस जांच नहीं की गई, जिससे अस्पताल संचालकों के हौसले बढ़ गए हैं।
फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी ने मांग की है कि मृतक के पोस्टमार्टम की सीडी, उपचार की पूरी फाइल, संबंधित डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटर के दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की जाए। पार्टी ने 15 दिनों के भीतर दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करने और जिले में संचालित सभी मल्टीस्पेशलिस्ट अस्पतालों का भौतिक सत्यापन कर अवैध संचालन पर तत्काल रोक लगाने की मांग भी रखी है।
प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर में उग्र जनआंदोलन किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कराई जाएगी। इस पूरे मामले को लेकर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं और आम जनता में आक्रोश देखा जा रहा है।
अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

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