
राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)।
छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपरा और जनजीवन का प्रतीक माने जाने वाले मंडई मेला को लेकर एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। संस्कारधानी राजनांदगांव से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित तुमडीबोर्ड गांव में 2 फरवरी को आयोजित होने वाले मंडई मेला से पहले एक कथित “टुकलकी फरमान” जारी किया गया है, जिसे संविधान के मूल अधिकारों के प्रतिकूल बताया जा रहा है। इस पूरे मामले को लेकर कर्तव्य न्याय भागीदारी जन आंदोलन के संयोजक शिव शंकर सिंह गौर ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
जानकारी के अनुसार, गांव के ही एक कथित दबंग व्यक्ति के दबाव में यह फरमान जारी किया गया है कि मंडई मेला में बाहर से आने वाले घुमंतू दुकानदारों—विशेषकर अंडा और चिकन बेचने वाले लोगों—को दुकान लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं, फरमान में यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि कोई दुकानदार इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कथित रूप से कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश न तो किसी वैधानिक प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया है और न ही इसके पीछे कोई कानूनी आधार स्पष्ट किया गया है।
इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्तव्य न्याय भागीदारी जन आंदोलन के संयोजक शिव शंकर सिंह गौर ने कहा कि यह फरमान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) में प्रदत्त व्यापार और व्यवसाय की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि मंडई मेला केवल मनोरंजन या परंपरा का उत्सव नहीं है, बल्कि सैकड़ों घुमंतू परिवारों के लिए आजीविका का प्रमुख साधन भी है। ऐसे में किसी एक व्यक्ति या समूह द्वारा मनमाने ढंग से व्यापार पर प्रतिबंध लगाना असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण है।
शिव शंकर सिंह गौर ने यह भी सवाल उठाया कि जब पूरे छत्तीसगढ़ में बड़े-बड़े व्यापारी बाहर से आकर विभिन्न क्षेत्रों में अपने व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं और उन्हें किसी प्रकार की रोक-टोक नहीं है, तो फिर छोटे, गरीब और घुमंतू छत्तीसगढ़िया लोगों की रोजी-रोटी पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है। उन्होंने इसे सामाजिक भेदभाव और दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
उनका कहना है कि यदि मंडई मेला संचालन समिति इस तरह के फरमान का पालन करती है, तो यह न केवल घुमंतू दुकानदारों के अधिकारों का हनन होगा, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14 और 19) पर भी सीधा हमला होगा। यह तय करना होगा कि प्रदेश संविधान से चलेगा या फिर कुछ दबंगों के फरमान से।
कर्तव्य न्याय भागीदारी जन आंदोलन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर ऐसे अवैधानिक आदेश को निरस्त किया जाए और मंडई मेला को संविधान एवं कानून के दायरे में निष्पक्ष रूप से आयोजित कराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि घुमंतू दुकानदारों और छोटे व्यापारियों के अधिकारों की रक्षा नहीं की गई, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा।
अंततः मंडई मेला छत्तीसगढ़ की आत्मा और संस्कृति का प्रतीक है। इसे किसी भी सूरत में मनमानी, भेदभाव और असंवैधानिक फरमानों का शिकार नहीं बनने दिया जा सकता।
