
बालोद। महिलाओं के अधिकार और समानता को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) एवं चैतन्य संस्था के संयुक्त तत्वावधान में गुण्डरदेही ब्लॉक में “जेंडरगत भेदभाव एवं समानता” विषय पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में ब्लॉक के सिकोसा, डूडेरा, भरदाकला और भटागांव आर क्लस्टरों से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी रही।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में जेंडर असमानता, भेदभाव और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। प्रशिक्षकों ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज भी समाज के कई वर्गों में महिलाएं असमान व्यवहार और सामाजिक भेदभाव का सामना करती हैं। ऐसे में शिक्षा, कानूनी जानकारी और आत्मविश्वास ही इन बाधाओं को दूर करने का सबसे बड़ा साधन है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी महिलाओं को महिला सुरक्षा एवं अधिकार से संबंधित कई महत्वपूर्ण कानूनों की जानकारी दी गई। इनमें कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम 2013, घरेलू हिंसा अधिनियम 2005, बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006, दहेज निषेध अधिनियम 1961 तथा कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम अधिनियम 1994 प्रमुख रहे। प्रशिक्षकों ने इन कानूनों की उपयोगिता और वास्तविक जीवन में इनके प्रयोग के बारे में विस्तार से बताया।
इस अवसर पर NRLM “बिहान” की पीआरपी नीलम निर्मलकर, कांति साहू, तोमेश्वरी सिंहा और हेमा साहू ने विशेष सहयोग दिया। वहीं चैतन्य संस्था की ओर से शेषपाल साहू (जिला समन्वयक), खुशबू साहू और प्रीतिबला साहू बतौर प्रशिक्षक उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के संचालन एवं आयोजन में जेंडर बीआरपी रीना पटेल, गिरिजा साहू और पिंकी ठाकुर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रतिभागी महिलाओं ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें अपने अधिकारों, कानूनों और समाज में समान स्थान पाने की दिशा में ठोस जानकारी प्राप्त हुई है। महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने गांवों में जाकर अन्य महिलाओं को भी जेंडर समानता और आत्मनिर्भरता के प्रति प्रेरित करेंगी।
कार्यक्रम के अंत में यह घोषणा की गई कि गुण्डरदेही ब्लॉक में शीघ्र ही “जेंडर रिसोर्स सेंटर (Gender Resource Centre)” की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र महिलाओं के सशक्तिकरण, सहायता, परामर्श और संरक्षण से जुड़ी सभी गतिविधियों का मुख्य केंद्र होगा। यहां घरेलू हिंसा, लैंगिक भेदभाव और उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को काउंसलिंग, कानूनी सलाह, हेल्पलाइन सेवाएं और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में मदद की जाएगी।
