
राजनांदगांव। नवरात्रि पर्व पर जहां माता रानी की भक्ति और श्रद्धा का वातावरण पूरे नगर में व्याप्त है, वहीं सामाजिक कुरीतियों और वर्तमान समय की चुनौतियों को लेकर जागरूकता का संदेश देने का भी कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव के मां शीतला मंदिर चौक में सर्व हिंदू समाज द्वारा एक विशेष झांकी का आयोजन किया गया, जिसे माताओं और बहनों ने विशेष रूप से सराहा। इस झांकी का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त “लव जिहाद” जैसे गंभीर विषय को उजागर करना और बहनों को समय रहते जागरूक करना रहा।

झांकी में महाभारत की घटना का विशेष चित्रण किया गया, जिसमें द्रौपदी की पुकार और कौरव दरबार का प्रसंग प्रमुख रूप से दिखाया गया। साथ ही पोस्टर पर लिखे संदेश ने सभी का ध्यान आकर्षित किया –
“सुनो द्रौपदी! शस्त्र उठालो अब गोविंद न आएंगे… छोड़ो मेहंदी, खड्ग संभालो। खुद ही अपना चीर बचा लो…”
यह संदेश नारी शक्ति को आत्मरक्षा और आत्मसम्मान के लिए जागरूक करता है।

झांकी को देखने के लिए आसपास के क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। माताओं और बहनों ने कहा कि समाज में इस तरह की पहल आवश्यक है क्योंकि आजकल बहन-बेटियों को विभिन्न प्रकार के षड्यंत्रों का सामना करना पड़ रहा है। युवतियों को जागरूक करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।
कार्यक्रम में उपस्थित सर्व हिन्दू समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि नवरात्रि शक्ति का पर्व है, और इसका वास्तविक संदेश तभी सार्थक होगा जब समाज की बेटियां स्वयं सशक्त होकर अपने सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना सीखें। उन्होंने कहा कि “लव जिहाद” जैसी घटनाएं समाज के सामने गंभीर चुनौती हैं, जिन्हें रोकने के लिए परिवार, समाज और संगठन सभी को एकजुट होकर कार्य करना होगा।

मौके पर उपस्थित महिलाओं ने कहा कि नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना के साथ-साथ यदि हम अपनी बेटियों को जागरूक करने का संकल्प लें तो यह पर्व और भी सार्थक बन जाएगा। कई युवतियों ने भी इस संदेश से प्रेरणा लेते हुए आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छा जताई।

कार्यक्रम के दौरान वातावरण में जय माता दी के जयघोष गूंजते रहे और मातृशक्ति को आत्मबल के साथ समाज में आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। झांकी देखने आए लोगों ने कहा कि यह पहल केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का संदेश भी है।
इस अवसर पर नगर के कई प्रतिष्ठित लोग भी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि सर्व हिन्दू समाज द्वारा प्रस्तुत यह झांकी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक जागरूकता की दिशा में एक सराहनीय कदम भी है।
नवरात्रि पर्व पर मां शीतला मंदिर चौक में सजी इस झांकी ने यह स्पष्ट कर दिया कि शक्ति की पूजा केवल मंदिरों में दीप जलाने और आरती करने से नहीं होती, बल्कि वास्तविक शक्ति जागरण तब होगा जब समाज की हर बेटी अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा स्वयं करने में सक्षम बनेगी।

कुल मिलाकर, यह झांकी न केवल भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बनी बल्कि सामाजिक चेतना का एक सशक्त माध्यम भी साबित हुई।
