विकलांग बेटे की हत्या करने वाली मां गिरफ्तार, 24 घंटे में पुलिस ने किया खुलासा

राजनांदगांव। जिले के लालबाग थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक मां ने अपने ही दिव्यांग बेटे को पेट्रोल डालकर आग के हवाले कर मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद फरार हुई आरोपिया को थाना लालबाग पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

घटना अटल आवास कॉलोनी पेण्ड्री की है। यहां रहने वाली 60 वर्षीय सुहागा बाई पति स्व. आनंद साहू अपने दिव्यांग बेटे विरेन्द्र साहू के शराब पीने और गाली-गलौज से लंबे समय से परेशान थी। बताया जाता है कि बेटे के व्यवहार से तंग आकर उसने दो दिन पहले ही उसे जला कर मारने की योजना बना ली थी। इसके लिए 20 सितंबर को पेट्रोल खरीदकर प्लास्टिक की बोतल में घर में छुपाकर रखा था।

22 सितंबर की सुबह सुहागा बाई और उसके बेटे विरेन्द्र साहू के बीच कहासुनी हो गई। उसी दौरान प्रार्थिया हिना साहू, जो मृतक की पत्नी है, अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने गई थी। इसी बीच सुहागा बाई ने अपने बेटे पर पेट्रोल छिड़ककर माचिस से आग लगा दी और कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। चीख-पुकार सुनकर पड़ोसी दौड़े और पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। विरेन्द्र को गंभीर अवस्था में 108 एम्बुलेंस से शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

मृतक की पत्नी हिना साहू की रिपोर्ट पर थाना लालबाग पुलिस ने अपराध क्रमांक 439/25 धारा 109 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। बाद में विरेन्द्र की मौत होने पर प्रकरण में धारा 103(1) बीएनएस भी जोड़ी गई।

पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक राहुल देव शर्मा तथा नगर पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र नायक के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी राजेश साहू ने त्वरित कार्रवाई की। आरोपिया सुहागा बाई घटना के बाद फरार हो गई थी, जिसे तलाश कर पुलिस ने 23 सितंबर को गांधी चौक स्थित अपने रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपिया ने अपराध स्वीकार करते हुए कहा कि वह कई वर्षों से अपने बेटे के शराबखोरी और गाली-गलौज से परेशान थी।

पुलिस ने घटना में प्रयुक्त माचिस की डिब्बी और पेट्रोल गंधयुक्त बोतल को भी जब्त किया है। आरोपिया के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

पूरे मामले में निरीक्षक राजेश साहू, सउनि ईश्वर यादव, सउनि शोभाराम बेरवंशी, आरक्षक राजकुमार बंजारा, आरक्षक कमल किशोर यादव और महिला आरक्षक हिमा चंद्राकर की भूमिका सराहनीय रही।

यह घटना न केवल समाज को झकझोरने वाली है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि घरेलू विवाद और नशे की आदतें किस हद तक परिवारों को तोड़ सकती हैं। पुलिस की तत्पर कार्रवाई से मामले का खुलासा तो हो गया, लेकिन यह घटना लंबे समय तक लोगों की यादों में खौफनाक कहानी के रूप में बनी रहेगी।

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