पितृ अमावस्या पर गौमाता सेवा आर्मी की पहलः संविधान के अनुच्छेद 48 के पालन का दिया संदेश

राजनांदगांव।  पितृ अमावस्या के पावन अवसर पर गौमाता सेवा आर्मी ने एक अनूठी मिसाल पेश की। संस्था ने संविधान के अनुच्छेद 48 में वर्णित गौवंश संरक्षण के सिद्धांत को जीवन में उतारते हुए न केवल गौमाता की सेवा की, बल्कि समाज को भी प्रेरक संदेश दिया।

गौ सेवा आर्मी के प्रदेश प्रवक्ता श्री शिवशंकर सिंह ने पत्रिका खबर को बताया कि पितृ अमावस्या पर संस्था के सदस्यों ने सिटी बस सेंटर रेवाडीह कांजी हाउस पहुंचकर गौमाता को खिचड़ी व सूखा चारा खिलाकर पितृ तर्पण किया। इस अवसर पर प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष खोब्रागड़े ने विशेष रूप से हरे चारे की व्यवस्था की।

कार्यक्रम में कुदन सोनी, शिवम चौधरी, इंजीकान्त चितवरकर, प्रेम कापसे, अशोक सारथी, राजू भोईर समेत कई सदस्य शामिल हुए। स्थानीय निवासियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्य न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज को नैतिकता और कर्तव्य पालन का भी बोध कराता है।

संस्था के कार्यकर्ता केवल पर्व-त्योहारों पर ही नहीं, बल्कि वर्षभर गौवंश की सेवा और सुरक्षा में सक्रिय रहते हैं। घायल गौमाता की सेवा हेतु वे गांव-गांव जाकर कार्य करते हैं। टीम न केवल डॉक्टरी सुविधा उपलब्ध कराती है, बल्कि दवाइयों और देखभाल की जिम्मेदारी भी उठाती है। संस्था की यह प्रतिबद्धता समाज में नई सोच का संचार कर रही है।

मनोहर यादव के नेतृत्व में प्रदेश भर में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को गौवंश संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। संस्था लगातार सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय है। सड़कों पर भटक रही और दुर्घटनाग्रस्त गौमाता की रक्षा के लिए टीम सतत प्रयास करती है।

गौमाता सेवा आर्मी की यह पहल स्पष्ट करती है कि आज की युवा पीढ़ी सामाजिक दायित्वों को गंभीरता से समझ रही है। संगठन ने यह भी संदेश दिया कि पितरों की आत्मा को शांति दिलाने का सर्वोत्तम मार्ग गौसेवा है।

रेवाडीह में हुए इस आयोजन ने यह साबित किया कि जब समाज के लोग मिलकर संकल्प लेते हैं तो बड़े बदलाव की नींव रखी जा सकती है। गौमाता सेवा आर्मी की यह सेवा यात्रा निश्चित रूप से प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में गौसंरक्षण आंदोलन को नई दिशा देने वाली है।

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