सिटी स्कैन मशीन खरीदी घोटाला: कांग्रेस नेताओं की चुप्पी पर सवाल

राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में सिटी स्कैन मशीन की खरीदी को लेकर करोड़ों का भ्रष्टाचार सामने आने के बाद अब इस मामले ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कांग्रेस नेताओं पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ओस्तवाल ने कहा कि ढाई करोड़ की कीमत वाली मशीन को ग्यारह करोड़ रुपये में खरीदा गया, जो स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के जिला और प्रदेश स्तर पर जांच की मांग जरूर की जा रही है, लेकिन कांग्रेस के पांचों विधायक विधानसभा में इस पर सवाल क्यों नहीं उठा रहे, यह सबसे बड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की भूमिका सिर्फ ज्ञापन सौंपकर फोटो खिंचवाने तक सीमित रह गई है, जिससे जनता में गलत संदेश जा रहा है।

पूर्व पार्षद ने प्रदेश प्रवक्ता रूपेश दुबे और शहर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कुलबीर सिंह छाबड़ा से मांग की है कि वे इस मामले को पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा विधायक भूपेश बघेल के संज्ञान में लाएं और विधानसभा में सवाल उठाकर समय सीमा में जांच करवाएं। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो जनता मान लेगी कि कांग्रेस संगठन जनहित के गंभीर मुद्दों पर भी गंभीर नहीं है।

ओस्तवाल ने भाजपा नेताओं पर भी कटाक्ष किया और कहा कि जब इस मामले पर मीडिया में सवाल उठाए गए तो भाजपा विधायक और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने लापरवाह रवैया दिखाते हुए कहा कि “कांग्रेस की बात कौन सुन रहा है।” उन्होंने कहा कि यह रवैया जनता के स्वास्थ्य और जनहित से खिलवाड़ है।

उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस यदि इस तरह की गंभीर जनहित की लड़ाई को आपसी खींचतान और फोटोबाजी तक सीमित रखेगी, तो 2028 के चुनाव में जनता फिर से भाजपा को मौका दे सकती है। ओस्तवाल ने साफ कहा कि कांग्रेस नेताओं को “नूरा कुश्ती” छोड़कर ठोस कार्रवाई करनी चाहिए, अन्यथा जनता का भरोसा पूरी तरह से उठ जाएगा।

जनता भी अब सवाल पूछ रही है कि जब भ्रष्टाचार के इतने गंभीर मामले सामने हैं, तब विपक्षी दल के नेता इसे विधानसभा में जोरदार ढंग से क्यों नहीं उठा रहे? कांग्रेस नेताओं की यह चुप्पी कहीं न कहीं भाजपा को राजनीतिक लाभ ही पहुंचा रही है।

इस पूरे विवाद ने राजनांदगांव की राजनीति को एक बार फिर गर्मा दिया है और आने वाले समय में यह मामला और तूल पकड़ सकता है। जनता अब इस बात का इंतजार कर रही है कि कांग्रेस विधायक और नेतृत्व इस मुद्दे को विधानसभा के पटल पर कितनी मजबूती से रखते हैं।

 कुल मिलाकर, सिटी स्कैन मशीन की खरीदी में हुए कथित घोटाले ने न केवल प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि विपक्ष की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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