
मोहला/मानपुर-अंबागढ़ चौकी (छत्तीसगढ़)।
किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने एक बड़ा निर्णय लिया है। यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसानों की जायज मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संगठन 09 सितम्बर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेगा। इसकी औपचारिक सूचना यूनियन द्वारा जिला प्रशासन को लिखित रूप में दे दी गई है।
पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार और राज्य सरकार की ओर से किसानों के साथ लगातार उपेक्षा और अन्याय हो रहा है। इस संबंध में भारतीय किसान यूनियन, जिला मोहला-मानपुर-अ. चौकी ने कई बार जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को आवेदन प्रस्तुत किया, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हुई है। किसानों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार न किए जाने के कारण यूनियन ने यह कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया है।

यूनियन का कहना है कि किसानों की न्यायसंगत मांगों के अनुरूप कृषि विभाग, उत्पादन कंपनियों और कृषि अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन प्रशासन द्वारा इस दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। ऐसे हालात में किसानों को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मजबूरन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन का सहारा लेना पड़ रहा है।
भारतीय किसान यूनियन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक किसानों की मांगों पर आवश्यक कार्यवाही नहीं की जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल जिला स्तर पर अनवरत रूप से चलेगी और इसका नेतृत्व कोर कमेटी करेगी।
यूनियन ने प्रशासन से आग्रह किया है कि इस आंदोलन की सूचना को गंभीरता से लेते हुए आवश्यकतानुसार ठोस कदम उठाए जाएं, जिससे किसानों को बार-बार सड़कों पर उतरने की नौबत न आए।
इस पूरे मामले में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश विधिक सलाहकार महेंद्र कुमार साहू ने कहा कि किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। चाहे वह नकली खाद-बीज की समस्या हो, उत्पादन लागत और समर्थन मूल्य का मुद्दा हो या फिर कृषि विभाग की अनियमितताएं—सभी मामलों में किसानों को धोखा मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसान अपने अधिकारों के लिए अब चुप नहीं बैठेगा।
पत्र की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक मोहला, कलेक्टर कार्यालय और राज्य स्तर पर संगठन के प्रतिनिधियों को भी भेजी गई है। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से होगा, लेकिन यदि प्रशासन ने लापरवाही बरती तो किसान बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
यूनियन के नेताओं ने कहा कि किसान देश की रीढ़ है, लेकिन यदि उसे न्याय नहीं मिला तो अन्नदाता का जीवन और कठिनाइयों में घिर जाएगा। ऐसे में सरकार और प्रशासन को तत्काल कदम उठाकर किसानों का विश्वास बहाल करना चाहिए।
