सुकमा स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर भ्रष्टाचार के आरोप, युवाओं में आक्रोश

सुकमा, 6 सितम्बर 2025।
सुकमा जिले में डीएमएफ फंड से स्वास्थ्य विभाग में की जा रही भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों ने सीएमएचओ कार्यालय पर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस भर्ती में पारदर्शिता पूरी तरह नदारद रही। योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर अपात्रों को पात्र घोषित करना, परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप ने पूरी प्रक्रिया की साख पर बट्टा लगा दिया है।

पात्र को अपात्र, अपात्र को पात्र

अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कई उम्मीदवारों ने समय पर सभी दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन महज़ लिफाफे में पदनाम न लिखने जैसे छोटे कारणों से उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया। इसके उलट, ऐसे कई उम्मीदवार जिनके दस्तावेज अधूरे थे, उन्हें पात्र घोषित कर दिया गया। इस दोहरे मापदंड ने भर्ती की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

परीक्षा में अव्यवस्था

भर्ती परीक्षा से महज़ कुछ घंटे पहले, 5 सितम्बर की शाम 5 बजे दावा-आपत्ति निराकरण सूची जारी की गई, जबकि परीक्षा 6 सितम्बर को सुबह 11 बजे आयोजित थी। दूर-दराज़ से आए अभ्यर्थियों को तैयारी और संशोधन का अवसर ही नहीं मिला। परीक्षा केंद्रों पर भी अभ्यर्थियों को रोल नंबर नहीं दिए गए और न ही बैठने की उचित व्यवस्था की गई। इस लापरवाही ने परीक्षा की गोपनीयता और गंभीरता दोनों को प्रभावित किया।

राजनीतिक दबाव और पक्षपात

कुछ अभ्यर्थियों का आरोप है कि राजनीतिक नेताओं की सिफारिश पर विशेष उम्मीदवारों को नियम तोड़कर परीक्षा में बैठने दिया गया। बताया गया कि दोरनापाल क्षेत्र के एक उम्मीदवार को दो घंटे देर से पहुँचने के बावजूद परीक्षा में शामिल कर लिया गया, जबकि कई उम्मीदवारों को केवल पाँच मिनट की देरी पर बाहर कर दिया गया। इस पक्षपात ने अभ्यर्थियों में आक्रोश और बढ़ा दिया है।

अधिकारियों का बेरुखा रवैया

अपात्र घोषित किए गए उम्मीदवारों ने जब सीएमएचओ और कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहा तो उन्हें मिलने से ही रोक दिया गया। यहाँ तक कि शिकायत सुनने के बजाय दरवाज़ा बंद कर दिया गया। इससे यह संदेश गया कि अधिकारी जवाबदेही निभाने से बच रहे हैं।

भर्ती बनी कमाई का जरिया

कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी और नेता भर्ती को कमाई का जरिया बना चुके हैं। योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से सुकमा आए युवाओं ने इसे अपमान और अन्याय करार दिया है।

अभ्यर्थियों की माँग

पूरी भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच हो।

दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर निष्पक्ष परीक्षा कराई जाए।

योग्य उम्मीदवारों को न्याय दिलाया जाए।

बड़ा सवाल

अब सवाल यह है कि क्या सुकमा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन आरोपों पर कोई ठोस कदम उठाएंगे? क्या मुख्यमंत्री तक यह आवाज पहुँचेगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दब जाएगा?

अभ्यर्थियों का कहना है कि यह सिर्फ उनके भविष्य का सवाल नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता की भी बड़ी परीक्षा है।

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