
मोहला।
जिलाधीश कार्यालय के ठीक सामने स्थित मोहला का सार्वजनिक शौचालय आज लापरवाही और लचर व्यवस्था की जीती-जागती मिसाल बन गया है। लगभग 6 लाख 55 हजार रुपये की लागत से निर्मित यह शौचालय, जिसका निर्माण हुए अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है, अब खस्ताहाल स्थिति में पहुँच चुका है। जिस उद्देश्य से इसे बनाया गया था—सार्वजनिक सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए—वह उद्देश्य मात्र कागजों और उदघाटन कार्यक्रम तक ही सीमित रह गया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शौचालय की देखरेख और नियमित सफाई की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। नतीजतन यहाँ हमेशा गंदगी का अंबार रहता है, जिससे आने-जाने वाले लोग परेशान रहते हैं। टाइल्स उखड़ने लगी हैं, दरवाजे चरमराकर टूटने की कगार पर हैं और पानी की टंकियों व नलों में लगातार समस्या बनी रहती है। ऐसी हालत में महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग इस शौचालय का उपयोग करने से कतराने लगे हैं।
नागरिकों ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर जब 6.55 लाख रुपये की बड़ी राशि इस निर्माण कार्य में खर्च की गई थी, तो फिर इतनी जल्दी इसकी हालत क्यों बिगड़ गई? यह सीधे तौर पर निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। आम जनता का मानना है कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और जिम्मेदार एजेंसी व पंचायत ने निगरानी में लापरवाही बरती।

एक स्थानीय व्यापारी ने कहा, “यह शौचालय सार्वजनिक उपयोग के लिए बनाया गया था, लेकिन इसकी हालत देखकर लोग दूर से ही किनारा कर लेते हैं। यह सरासर जनता के पैसों की बर्बादी है।” वहीं मोहला के कुछ युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी जिला प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की चुप्पी से नागरिकों में नाराजगी स्पष्ट दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि इतनी राशि खर्च करने के बाद भी एक साल में ही शौचालय जर्जर हो गया, तो निश्चित रूप से कहीं न कहीं भ्रष्टाचार और अनियमितता हुई है।
नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी एजेंसी एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, शौचालय की तत्काल मरम्मत और नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि आमजन को सुविधा मिल सके।
गौरतलब है कि स्वच्छ भारत मिशन और सरकार की योजनाओं के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है, ताकि खुले में शौच की समस्या खत्म हो और लोगों को साफ-सुथरी सुविधा मिल सके। लेकिन मोहला का यह मामला यह दर्शाता है कि योजनाओं का लाभ तभी मिल पाएगा जब निर्माण कार्य गुणवत्ता युक्त हो और देखरेख की ठोस व्यवस्था की जाए।
