
राजनांदगांव।
कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन छत्तीसगढ़ ने राजनांदगांव नगर निगम क्षेत्र में स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर चौक पर स्थापित संविधान प्रतिमा के जीर्णोद्धार एवं संरक्षण की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। आंदोलन के संयोजक शिवशंकर सिंह और प्रदेश अध्यक्ष श्री राजू बारमाटे ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम प्रशासन से औपचारिक मांग की जाएगी कि संविधान की प्रतिकृति को यथावत रखते हुए उसे सुसज्जित किया जाए।

नेताओं ने कहा कि भारतीय संविधान सिर्फ एक ग्रंथ नहीं, बल्कि देश की आत्मा है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान देश को स्वतंत्रता, समानता और बंधुता का मार्ग दिखाता है। यह सभी नागरिकों को स्वतंत्रता का अधिकार, महिलाओं को समान अधिकार, शिक्षा का अधिकार और भाईचारे का संदेश देता है। इसी कारण संविधान का प्रतीक स्वरूप देश के हर शहर और चौक-चौराहों पर स्थापित होना चाहिए। संगठन ने घोषणा की कि भविष्य में संविधान चौक के रूप में हर शहर में पहचान बने, इसके लिए आंदोलन प्रदेश स्तर पर चलाया जाएगा।

श्री बारमाटे ने जानकारी दी कि राजनांदगांव के डॉ. अंबेडकर चौक पर संविधान की प्रतिकृति समाज के युवाओं की पहल पर स्थापित की गई थी। लेकिन हाल ही में कुछ संविधान विरोधी तत्वों ने नगर निगम को यह प्रतिकृति हटाने का प्रस्ताव दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस प्रयास ने संविधान में विश्वास रखने वाले नागरिकों में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है।
आंदोलन के संयोजक शिवशंकर सिंह ने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर संविधान की प्रतिकृति को हटाने या कमजोर करने की कोशिश की गई तो संगठन सड़कों पर उतरकर प्रदेशव्यापी आंदोलन करेगा। इसके अलावा चौक पर स्थित विदेशी शराब दुकान को स्थानांतरित करने की भी मांग की जाएगी, ताकि संविधान चौक का पवित्र वातावरण सुरक्षित रहे।
संगठन का मानना है कि संविधान की रक्षा करना हर नागरिक का दायित्व है। आंदोलन के पदाधिकारियों ने नगर निगम को पत्र के माध्यम से अवगत कराने की योजना बनाई है और स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी मांगों पर अमल नहीं हुआ तो शहर की समितियों, वार्ड समितियों और अन्य संगठनों के सहयोग से तीव्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रदेश अध्यक्ष राजू बारमाटे ने नागरिकों से अपील की है कि “संविधान ही देश की शान है और जो संविधान की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा।” उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी दल, संगठन और आम नागरिक एकजुट होकर संविधान के सम्मान के लिए खड़े हों।
सभा में यह भी निर्णय लिया गया कि भारत के संविधान की प्रस्तावना को प्रत्येक संविधान चौक पर लिखवाया जाएगा। इसके लिए संविधान में आस्था रखने वाले संगठनों से सहयोग लिया जाएगा। यदि इस प्रक्रिया में कोई अड़चन आती है, तो इसे भी आंदोलन का मुद्दा बनाया जाएगा।
अंत में संगठन ने यह संदेश दिया कि –
“संविधान की बात है, इससे पूरा देश चलता है। संविधान का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है।”
जय संविधान, जय भारत।
