राजनांदगांव: क्रांति बंजारे ने किया “क्रांति का आगाज”, सड़क हादसे से आक्रोशित जनता

राजनांदगांव। जिले के डोंगरगांव मार्ग पर स्थित ग्राम दीवान भेड़ी में रविवार को एक दर्दनाक हादसा घटित हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। सड़क से गुजर रहे एक भारी ट्रेलर वाहन ने मात्र 3 वर्षीय मासूम प्रांजल साहू पिता सुजल साहू को कुचल दिया। मासूम की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर प्रतिदिन 40 से 50 टन से अधिक वजन वाले वाहन गुजरते हैं। बावजूद इसके, सड़क की स्थिति अत्यंत जर्जर है। गड्ढों और संकरे मार्ग के कारण हर समय दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस सड़क के दोनों ओर घनी आबादी बसी हुई है और भारी वाहनों की आवाजाही लोगों की जान के लिए स्थायी खतरा बन चुकी है।

क्रांति बंजारे का सवाल – प्रशासन मौन क्यों?

इस गंभीर हादसे के बाद पूर्व जिला पंचायत सदस्य क्रांति बंजारे मौके पर पहुंचे और उन्होंने इस मुद्दे को प्रशासन के सामने रखा। उन्होंने सीधे एसडीएम से सवाल किया कि क्या इस मार्ग पर इतने भारी वाहनों के चलने की अनुमति है और आखिर इस सड़क की क्षमता कितनी निर्धारित है? इस पर एसडीएम ने स्पष्ट कहा कि उन्हें इस विषय की जानकारी नहीं है।

क्रांति बंजारे ने मामले की गहराई से जांच करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) कार्यालय का दौरा किया। वहां से मिली जानकारी ने स्थिति को और चिंताजनक बना दिया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि इस सड़क पर पांच धुरी वाले वाहन चलने की अनुमति है, जिनका वजन लगभग 35 टन से 150 टन तक होता है। सवाल यह है कि जब सड़क इतनी खराब स्थिति में है, तब इतने भारी वाहनों की आवाजाही कैसे और किसके आदेश से हो रही है?

सड़क हादसे रोकने की मांग

क्रांति बंजारे ने कहा कि यह सड़क ग्रामीणों और आम जनता के जीवन के लिए खतरा बन चुकी है। सड़क की हालत को देखते हुए न तो यह भारी वाहनों का दबाव सह सकती है और न ही स्थानीय बस्तियों के लिए सुरक्षित है। उन्होंने मांग की कि:

1. सड़क की तत्काल मरम्मत और चौड़ीकरण हो।

2. दोनों ओर बैरिकेड्स और सुरक्षा प्रबंध किए जाएं।

3. भारी वाहनों की आवाजाही पर कड़ाई से नियंत्रण लगाया जाए।

4. यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

आंदोलन की चेतावनी

क्रांति बंजारे ने साफ कहा कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे जनता के साथ सड़क पर उतरकर जन आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रशासन के लिए चुनौती

यह हादसा प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। लगातार बढ़ते हादसों और जनता के आक्रोश को देखते हुए अब तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है। सड़क की मरम्मत, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा उपाय ही आगे ऐसे हादसों को रोक सकते हैं।

मासूम की दर्दनाक मौत ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर विकास और परिवहन की कीमत आम जनता की जान क्यों चुकाए? अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस गहरी समस्या का समाधान कितनी जल्दी निकालता है।

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