
राजनांदगांव/बालोद।
किसानों के हितों की रक्षा और खाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के डोंडी-लोहारा क्षेत्र में किसान बीज भण्डार द्वारा बिना वैध लाइसेंस के उर्वरक बिक्री का आरोप लगा है। इस संबंध में अधिवक्ता महेन्द्र कुमार साहू, जो भारतीय किसान यूनियन के विधिक सलाहकार भी हैं, ने कृषि विभाग को पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की मांग की है।
आवेदन में कहा गया है कि डोंडी-लोहारा स्थित किसान बीज भण्डार का जी-2 एवं जी-3 सर्टिफिकेट 16 जून 2025 को समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद दुकान संचालक द्वारा उर्वरकों की बिक्री की जा रही है, जो पूरी तरह नियम विरुद्ध है। न केवल यह, बल्कि इस भण्डार से किसानों को कालाधान (Black Urea) भी बेचा गया है, जिसकी बिक्री पहले से ही प्रतिबंधित है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान और उनकी फसल उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।
अधिवक्ता महेन्द्र कुमार साहू ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि बिना लाइसेंस और नियमों का पालन किए बिना उर्वरक की बिक्री करना किसानों की मेहनत और आजीविका पर कुठाराघात है। उन्होंने कृषि विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाए और संबंधित दुकान का लाइसेंस निरस्त किया जाए।
इस मामले को और भी गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार ने हाल ही में खाद नियंत्रण आदेश में संशोधन किया है। 17 मार्च 2025 को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना (The Gazette of India) में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी संस्था या व्यक्ति बिना मानक और बिना लाइसेंस के उर्वरक/बायो-स्टिमुलेंट्स का उत्पादन, भंडारण अथवा बिक्री नहीं कर सकेगा।
इस अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि यदि किसी कंपनी या विक्रेता का पंजीयन अथवा लाइसेंस समाप्त हो गया है, तो उसे अधिकतम तीन माह की मोहलत दी जाएगी। इस अवधि के भीतर उसे अपना नवीनीकरण कराना अनिवार्य होगा। पहले यह समयसीमा 22 फरवरी 2025 तय थी, जिसे संशोधित कर 16 जून 2025 तक बढ़ाया गया। यानी अब किसी भी दुकान अथवा कंपनी को इस तारीख के बाद बिना वैध पंजीयन और लाइसेंस के खाद बिक्री की अनुमति नहीं है।
राजपत्र का हवाला देते हुए किसान यूनियन ने जिला प्रशासन से कहा है कि यदि समय रहते इस तरह की दुकानों पर रोक नहीं लगाई गई तो किसानों को मिलावटी और अवैध खाद से भारी नुकसान होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में लापरवाही बरती गई तो किसान संगठन आंदोलन की राह पर भी जा सकता है।
किसानों से सीधे जुड़े इस मामले ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। एक ओर केंद्र सरकार ने गजट अधिसूचना जारी कर किसानों को सुरक्षा कवच देने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर बिना लाइसेंस खाद बिक्री के आरोप प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग इस मामले में कितनी शीघ्रता और सख्ती दिखाते हैं, क्योंकि यह केवल एक दुकान का मामला नहीं बल्कि किसानों की मेहनत और उनकी फसल सुरक्षा का मुद्दा है।
