
बालोद। (1 सितम्बर 2025) – पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम – बिहान) से जुड़ी सक्रिय महिला (सीआरपी) कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
महिलाओं ने बताया कि वे लंबे समय से गांव-गांव जाकर स्व-सहायता समूह की बैठकों का संचालन, प्रशिक्षण, ऑडिट, बीमा, जीविकोपार्जन गतिविधियों की जानकारी, विभिन्न योजनाओं का प्रचार-प्रसार, लोन आॅडिट और जागरूकता जैसे कार्य पूरी निष्ठा से कर रही हैं। इसके अलावा महिलाओं को स्वरोजगार, पशुपालन, कृषि, सिलाई, कढ़ाई, आजीविका से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षणों से जोड़ने का काम भी यही सक्रिय महिलाएं करती हैं।

उन्होंने कहा कि इन सभी कार्यों के बावजूद उन्हें उचित मानदेय प्राप्त नहीं हो रहा है। वर्तमान में उन्हें मात्र 1910 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जो उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों के हिसाब से बेहद कम है। ज्ञापन में कहा गया कि सीआरपी महिलाओं को ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों स्तर पर काम करना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें बार-बार कलेक्टर कार्यालय और ब्लॉक कार्यालय आना-जाना पड़ता है। इससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों होता है, लेकिन इसके लिए कोई अतिरिक्त राशि उपलब्ध नहीं कराई जाती।
महिलाओं का कहना है कि शासन और विभाग की अधिकांश योजनाएं इन्हीं के माध्यम से गांव तक पहुंचती हैं, परंतु उनकी मेहनत और लगन का समुचित मूल्यांकन नहीं हो रहा है। वे हर माह गांवों में जाकर मीटिंग लेना, प्रशिक्षण देना, आॅडिट कराना, सर्वेक्षण करना, विभिन्न योजनाओं के फॉर्म भरवाना और लोगों को डिजिटल माध्यम से जोड़ने का कार्य करती हैं। कई बार इन्हें रात तक कार्य करना पड़ता है, फिर भी उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो पा रही है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि –
1. सीआरपी (सक्रिय महिलाओं) का मानदेय बढ़ाया जाए।
2. ऑनलाइन कार्यों के लिए उन्हें उचित प्रशिक्षण और तकनीकी सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
3. लगातार आना-जाना और अतिरिक्त खर्च को देखते हुए भत्ता प्रदान किया जाए।

4. उनके कार्यों का समय-समय पर मूल्यांकन कर प्रोत्साहन राशि दी जाए।
इस दौरान बड़ी संख्या में बिहान की सक्रिय महिलाएं कलेक्टर कार्यालय बालोद पहुंचीं और सामूहिक रूप से अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं।
इसी बीच फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह गौर भी महिलाओं के समर्थन में आगे आए। उन्होंने कहा कि यह महिलाएं जमीनी स्तर पर शासन की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने में सेतु का कार्य कर रही हैं। इनके बिना योजनाओं की सफलता संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि महिलाओं की मानदेय वृद्धि और सुविधाओं पर तत्काल निर्णय लिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि 5वीं अनुसूची जो कि स्वशासी क्षेत्र है, वहां प्रदेश सरकार अनावश्यक दखल देकर दमनकारी नीति अपना रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गौर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि महिलाओं की मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
कलेक्टर को सौंपे गए इस ज्ञापन पर प्रशासन ने आश्वासन दिया कि उनकी समस्याओं और मांगों को शासन तक पहुंचाया जाएगा और जल्द समाधान की दिशा में पहल की जाएगी।
