
राजनांदगांव जिले में निजी अस्पतालों की मनमानी और लापरवाही लगातार लोगों की जान ले रही है। जिले के दो बड़े अस्पताल – संजीवनी हॉस्पिटल और दीक्षित मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित परिवारों ने जिला प्रशासन से दोनों अस्पतालों का लाइसेंस तुरंत निरस्त करने और अस्पताल प्रबंधन पर आपराधिक कार्रवाई करने की मांग की है।
आवेदन पत्र में कहा गया है कि संजीवनी हॉस्पिटल की घोर लापरवाही से विद्या संगोडे पति रितेश संगोडे और फूलाबाई जाटव की जान चली गई। पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संजीवनी अस्पताल से 25-25 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति और भरण-पोषण राशि दिलाई जाए।

इसी तरह दीक्षित मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर आरोप है कि लापरवाही के चलते फकीराराम पिता मालिकराम यादव की असमय मौत हुई। मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की गई है।
आवेदन में यह भी उल्लेख है कि जिले में चल रहे अधिकांश मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल आयुष्मान कार्ड योजना और नर्सिंग एक्ट का पालन नहीं कर रहे हैं। गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा और अस्पताल मनमानी फीस वसूल रहे हैं। इस पर तत्काल रोक लगाने और सभी अस्पतालों का भौतिक निरीक्षण कर दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की गई है।
सिर्फ अस्पताल ही नहीं, बल्कि जिले के स्वास्थ्य महकमे पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आवेदनकर्ताओं ने जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्न पर सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय की है। आरोप है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ लोक आयोग अधिनियम 2002, लोक सेवक अधिनियम 1965/64 और छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2011 का पालन नहीं किया। स्वास्थ्य सेवाओं में गड़बड़ी उनकी सीधी लापरवाही और मिलीभगत को दर्शाती है।
आवेदन में मांग की गई है कि डॉ. नेतराम नवरत्न की चल-अचल संपत्तियों की जांच कर उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए। यदि अस्पताल प्रबंधन पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने से इंकार करता है, तो यह राशि स्वयं डॉ. नेतराम नवरत्न द्वारा दी जाए, क्योंकि वे जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के सर्वोच्च जिम्मेदार अधिकारी हैं और उनकी कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े हो चुके हैं।
पीड़ितों का कहना है कि निजी अस्पताल अब “मौत के सौदागर” बन चुके हैं, जो इलाज के नाम पर गरीब और मासूम परिवारों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। ऐसी लापरवाही और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आवेदनकर्ताओं शिवशंकर सिंह और समशूल आलम ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो मामला जन आंदोलन का रूप लेगा। उन्होंने कहा कि सभी घटनाओं के पुख्ता सबूत और रिकॉर्ड उनके पास मौजूद हैं।
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सूचनार्थ प्रतिलिपि
1. पुलिस अधीक्षक महोदय राजनांदगांव
2. अनुविभागीय दंडाधिकारी राजनांदगांव
3. जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राजनांदगांव
4. नगर निगम आयुक्त राजनांदगांव
5. कार्यालय पत्रिका खबर राजनांदगांव
आवेदक:
शिवशंकर सिंह, समशूल आलम
मो. 8839300735
