निजी अस्पताल की लापरवाही: इकलौते बेटे की मौत, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

राजनांदगांव।
शहर के दीक्षित मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान 24 वर्षीय युवक की मौत ने पूरे जिले को हिला दिया है। मृतक बुचेटोला, अंबागढ़ चौकी का निवासी था और अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था। मामूली बुखार के इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन की कथित लापरवाही से उसकी मौत हो गई।

बिना रसीद वसूले 12,500 रुपये

परिजनों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के लिए तत्काल 12,500 रुपये नकद मांगे। राशि देने के बाद भी रसीद नहीं दी गई। जबकि युवक का इलाज आयुष्मान भारत कार्ड से होना चाहिए था। परिवार का आरोप है कि अस्पताल ने योजना की सुविधाओं को नकारकर जबरन वसूली की और इलाज में कोताही बरती।

बिगड़ी तबीयत, छिन गई जिंदगी

इलाज के दौरान युवक की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। मौत के बाद जब परिजनों ने इलाज की फाइल और कागजात मांगे तो अस्पताल ने देने से साफ इंकार कर दिया। इससे परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया।

नेताओं ने खोला मोर्चा

घटना की जानकारी मिलते ही फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह गौर, जनता जोगी कांग्रेस युवा मोर्चा के कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष शमशुल आलम और कर्त्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष राज बरमाटे अस्पताल पहुंचे। उन्होंने परिजनों से भेंट कर अस्पताल प्रबंधन को कटघरे में खड़ा किया।

“गरीबों की हत्या है यह”

शिवशंकर सिंह गौर ने कहा – “यह सिर्फ लापरवाही नहीं, गरीब की हत्या है। हमने पहले ही कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग को 18 निजी मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों के भौतिक निरीक्षण की मांग की थी, लेकिन प्रशासन कमीशनखोरी में चूर रहा। आज उसी का नतीजा है कि एक गरीब परिवार का इकलौता बेटा छिन गया।”

50 लाख मुआवजे और केस दर्ज की मांग

प्रदेश अध्यक्ष श्री गौर ने मृतक परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा देने, अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने और प्रबंधन सहित जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्न पर हत्या का प्रकरण दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो जिला स्वास्थ्य अधिकारी का घेराव कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

प्रशासन पर उठे सवाल

परिजनों का सवाल है कि जब सरकार करोड़ों खर्च कर गरीबों के लिए आयुष्मान भारत योजना चला रही है, तो उसका लाभ आखिर उन्हें क्यों नहीं मिल रहा? क्या प्रशासन की कमीशनखोरी गरीब की जान से भी ज्यादा अहम हो गई है?

अब देखना यह होगा…

घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की मनमानी और स्वास्थ्य सेवाओं की खस्ताहाल व्यवस्था को उजागर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करता है या फिर यह मामला आंदोलन का उग्र रूप लेगा।

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