शांति मशाल यात्रा : महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन का तृतीय चरण

राजनांदगांव।
महाबोधि महाविहार बोधगया को बौद्ध समाज को सौंपने और असंवैधानिक बोधगया मंदिर अधिनियम 1949 (बी.टी. एक्ट) को निरस्त करने की मांग को लेकर महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन अपने निर्णायक चरण की ओर बढ़ रहा है। इसी क्रम में आंदोलन के तृतीय चरण के प्रणेता डॉ. आकाश लामा के नेतृत्व में प्रदेश स्तरीय शांति मशाल यात्रा का आयोजन आगामी 24 अगस्त 2025, रविवार को राजनांदगांव में किया जा रहा है।

कार्यक्रम का आयोजन ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम छत्तीसगढ़ के बैनर तले किया जाएगा। आयोजक भिक्खु धम्मतप, छत्तीसगढ़ प्रभारी एवं राष्ट्रीय सलाहकार, ने जानकारी देते हुए बताया कि मशाल यात्रा सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कलेक्टर परिसर के सामने, ओवर ब्रिज के नीचे निकाली जाएगी। उन्होंने कहा कि यह यात्रा बौद्ध समाज की ऐतिहासिक मांग को बुलंद करेगी और महाबोधि महाविहार का पूर्ण प्रबंधन बौद्धों को सौंपे जाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगी।

इस यात्रा में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। प्रमुख अतिथियों में प्रदेश संघनायक भंते ज्ञानलोकेश्वर (बिहार), भंते सुमंगल (उत्तर प्रदेश), भंते सुदर्शन (मध्यप्रदेश), भंते अशोक रत्न (बिहार) समेत कई प्रख्यात बौद्ध भिक्षु उपस्थित रहेंगे।

मशाल यात्रा के मुख्य वक्ता डॉ. आकाश लामा होंगे, जो आंदोलन की रणनीति और आगामी चरणों की घोषणा करेंगे। उनके साथ अनेक विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिष्ट फोरम के राष्ट्रीय पदाधिकारी भी मंच साझा करेंगे।

आयोजन समिति ने सभी बौद्ध अनुयायियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार प्रेमियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर आंदोलन को गति दें। उनका कहना है कि “महाबोधि महाविहार की मुक्ति, बौद्ध समाज के सम्मान और आस्था से जुड़ा हुआ प्रश्न है। इसलिए हर अनुयायी की उपस्थिति आंदोलन को मजबूती देगी।”

शांति मशाल यात्रा को ऐतिहासिक और निर्णायक बताते हुए आयोजकों ने इसे एक जन-जागरण का रूप दिया है। मशाल यात्रा में हजारों की संख्या में बुद्ध अनुयायियों की उपस्थिति की संभावना जताई गई है।

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