
राजनांदगांव।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में जिला पंजीयक कार्यालय का हाल प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रहा है। यहां नागरिकों को ई-स्टाम्पिंग सुविधा देने का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि जरा सी बिजली गुल होते ही पूरा सिस्टम ठप पड़ जाता है। न बैकअप बैटरी, न जेनरेटर और न ही कोई आपातकालीन सुविधा – यानी पूरा कार्यालय बिजली की दया पर टिका हुआ है।सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यही सिस्टम कलेक्टरेट और जिला एवं सत्र न्यायालय के कामकाज को भी संचालित कर रहा है। ऐसे में न्याय और प्रशासन दोनों ही इलेक्ट्रॉनिक ब्लैकआउट के शिकार हैं। आम लोग घंटों लाइन में खड़े-खड़े थक जाते हैं, मगर अधिकारी कान में तेल डालकर सोए हुए हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यही सिस्टम कलेक्टरेट और जिला एवं सत्र न्यायालय के कामकाज को भी संचालित कर रहा है। ऐसे में न्याय और प्रशासन दोनों ही इलेक्ट्रॉनिक ब्लैकआउट के शिकार हैं। आम लोग घंटों लाइन में खड़े-खड़े थक जाते हैं, मगर अधिकारी कान में तेल डालकर सोए हुए हैं।
फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह गौर ने कड़ा हमला बोलते हुए कहा – “यह दयनीय स्थिति किसी साधारण इलाके की नहीं, बल्कि विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के निर्वाचन क्षेत्र की है। जब सत्ता शीर्ष के इलाके का हाल ये है तो बाकी प्रदेश का अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है। सरकार और प्रशासन ने ई-गवर्नेंस को मज़ाक बना दिया है।”

लोगों का कहना है कि यह सिर्फ अव्यवस्था नहीं, बल्कि जनता के साथ सीधा मज़ाक है। लाखों की योजनाएं और डिजिटल इंडिया के नारे धरे के धरे रह गए हैं और जनता सिर पीटने को मजबूर है l

