एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल पर फॉरवर्ड लेबर पार्टी ने मुख्य सचिव को भेजा पत्र, अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग

रायपुर।
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल पर जाने को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के ठप होने से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच फॉरवर्ड लेबर पार्टी, छत्तीसगढ़ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर हड़ताल पर गए एनएचएम कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की है।

प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह गौर ने पत्र में उल्लेख किया है कि वर्तमान में एनएचएम कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर विभिन्न जिलों में हड़ताल पर चले गए हैं। इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है बल्कि जनता के जीवन से खिलवाड़ भी है।

पत्र में कहा गया है कि हड़ताल के चलते राज्यभर में स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर असर पड़ा है। आयुष्मान भारत योजना, गर्भवती महिलाओं की देखरेख और टीकाकरण कार्यक्रम, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन, एवं सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो रही हैं। इससे ग्रामीण एवं गरीब वर्ग सबसे अधिक परेशान है और मजबूर होकर निजी अस्पतालों में महंगे इलाज का सहारा लेना पड़ रहा है।

गौर ने कहा कि एनएचएम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी गरीबों को सस्ती, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार, टीकाकरण, संक्रामक रोग नियंत्रण एवं परिवार नियोजन जैसे महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होना जनहित के विपरीत है।

पत्र में कानूनी पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है।

सरकारी सेवक आचरण नियम के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी को हड़ताल में भाग लेने या समर्थन करने की अनुमति नहीं है।

अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA), 1968 के अनुसार, हड़ताल में शामिल कर्मचारियों पर गिरफ्तारी, निलंबन या दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय (T.K. Rangarajan बनाम तमिलनाडु सरकार, 2003) का हवाला देते हुए कहा गया है कि सरकारी कर्मचारियों को हड़ताल का कोई मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं है।

साथ ही ‘No Work, No Pay’ सिद्धांत के आधार पर वेतन काटे जाने और विभागीय कार्यवाही की बात कही गई है।

फॉरवर्ड लेबर पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा शीघ्र सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो पार्टी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन के लिए बाध्य होगी।

इस मामले में अब राज्य सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है। स्वास्थ्य सेवाओं के बाधित होने से आमजन के बीच नाराजगी बढ़ रही है और लोग मांग कर रहे हैं कि शासन तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को सामान्य बनाए।

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