
राजनांदगांव।
फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री सिंह ने अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) राजनांदगांव के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिन पर ट्रैफिक नियम लागू कराने की जिम्मेदारी है, वही लोग खुलेआम इनका उल्लंघन कर रहे हैं।

श्री सिंह ने बताया कि हाल ही में कवर्धा और रायपुर में पुलिस ने बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट चलने वाले वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। बाइक स्टंट करने वालों और लापरवाह चालकों पर हुए इन अभियानों की उन्होंने सराहना करते हुए कहा कि इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि RTO के नियम तोड़ने वालों पर भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
लेकिन, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र तथा उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के गृह लोकसभा क्षेत्र राजनांदगांव में हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं। श्री सिंह के मुताबिक, RTO के ही तीन कर्मचारी—
1. नंदकुमार जोशी, सहायक ग्रेड-3
2. रमाकांत यादव
3. रूकेश्वर
—एक चलती कार में बिना सीट बेल्ट लगाए, कार स्टैंड और सड़क पर गाना गाते हुए वीडियो बनाते और मस्ती करते हुए देखे गए।
श्री सिंह ने आरोप लगाया कि यह न केवल ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सड़क सुरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उक्त कर्मचारी उस समय शराब के नशे में हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों पर नियम तोड़ने पर जुर्माना और कार्रवाई होती है, तो सरकारी कर्मचारी नियम तोड़ने पर कार्रवाई से क्यों बचें?
उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि RTO राजनांदगांव के अधिकारी इन तीनों कर्मचारियों पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई करें, अन्यथा हमें खुद आंदोलन और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने के लिए विवश होना पड़ेगा।”
श्री सिंह ने यह भी घोषणा की कि इस मामले की लिखित शिकायत RTO अधिकारी, पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव, जिला कलेक्टर, जिला दंडाधिकारी, अनुविभागीय दंडाधिकारी, परिवहन आयुक्त और राज्य सरकार रायपुर को की जाएगी। उन्होंने बताया कि सोमवार को वे अपनी टीम के साथ रायपुर स्थित सचिवालय पहुंचकर परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरा मामला सौंपेंगे।
इस घटना ने स्थानीय स्तर पर चर्चाओं को हवा दे दी है, क्योंकि यह मामला प्रदेश के प्रमुख नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़ा है। अब देखना यह होगा कि क्या RTO प्रशासन अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई करेगा या मामला दबा दिया जाएगा।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों का इस तरह से नियम तोड़ना न केवल उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम जनता के बीच भी नकारात्मक संदेश देता है। कानून सभी के लिए समान होना चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या सरकारी कर्मचारी।
