
हुक्म संघ के नवम पट्टधर युग निर्माता परम पूज्य आचार्य प्रवर 1008 श्री रामलालजी म. सा.बेले-बेले के तपस्वी,बहुश्रुत वाचनाचार्य उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म.सा.की आज्ञानुवर्ती शिष्या शासन दीपिका श्री प्रियंका श्रीजी म.सा. ठाणा-4 वर्षावास हेतु समता भवन गौरव पथ में सुखसाता पूर्वक विराज रहे है

राजनांदगांव। गुरु के प्रति श्रद्धा, आत्मिक जागृति और जीवन परिवर्तन के प्रेरणादायी संदेशों के साथ गुरुपूर्णिमा के पावन पर्व पर प्रवचन का शुभारंभ सेवाभावी श्री दीपिका श्री जी महाराज द्वारा प्रेरणास्पद भजन – “संकल्प मेरे मन में हो ऐसा, अब मैं बनूंगा महावीर जैसा…” – से हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। अपने प्रवचन में दीपिका श्री जी ने कहा, “मनुष्य जीवन अनमोल है, इसे क्षणिक सुखों में व्यर्थ न करें। हमें आत्मा की शुद्धि और शाश्वत सुख की ओर बढ़ना चाहिए।”
उन्होंने आगे कहा कि “हम शरीर नहीं, आत्मा हैं – और आत्मिक आनंद ही जीवन का सच्चा लक्ष्य होना चाहिए।”

सेवाभावी श्री श्रृंगार श्री जी महाराज ने गुरुपूर्णिमा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने भगवान राम और हनुमान जी के उदाहरण द्वारा सच्ची गुरु भक्ति की व्याख्या की और कहा कि “गुरु के प्रति श्रद्धा और समर्पण ही साधक की सच्ची पहचान है। वर्षावास का समय साधु-संतों के सान्निध्य में आत्मिक चिंतन के लिए सर्वोत्तम है।”
सभा के अंतिम चरण में शासन दीपिका श्री प्रियंका श्री जी महाराज ने “चौमासो लगो अब तो सगळा जागो…” जैसे भजन के माध्यम से चातुर्मास की महत्ता का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि “यह काल आत्म-संशोधन का समय है। राजनांदगांव संघ का सौभाग्य है कि आचार्य भगवंत के श्रीचरणों में चातुर्मास की स्वीकृति मिली है। अब हमें ‘मन रूपी रेनकोट’ उतारकर मन को शुद्ध, शांत और निर्मल बनाकर साधना में लगाना है।”
अपने प्रवचन के समापन में उन्होंने मार्मिक पंक्ति “अगर मुक्ति को पाना है, तो हमें निज को बदलना है…” के माध्यम से आत्मपरिवर्तन का संदेश दिया।
सभा का कुशल संचालन साधुमार्गी संघ राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री ललित जी चौरड़िया द्वारा किया गया। उन्होंने गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि “प्रवचनों की अमृतवाणी को हम सब अपने जीवन में आत्मसात करें और गुरुकृपा से अपने जीवन को सार्थक बनाएं।”
