राजनांदगांव में विवाह समारोह बना नेत्रदान जागरूकता का मंच, दूल्हा-दुल्हन समेत 14 लोगों ने लिया संकल्प

राजनांदगांव, 17 जून 2025 — समाज में जब विवाह जैसे पारंपरिक आयोजन भी मानवता और सामाजिक जागरूकता का माध्यम बन जाएं, तो वह निश्चित रूप से अनुकरणीय मिसाल पेश करते हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण राजनांदगांव में देखने को मिला, जहां एक शादी समारोह ने नेत्रदान जैसे महान कार्य को अपनाकर समाज को नई दिशा दी।

राजनांदगांव निवासी सूरज गुप्ता और खुशबू गुप्ता के विवाह समारोह को उनके परिवार और मित्रों ने केवल एक व्यक्तिगत उत्सव तक सीमित न रखकर, इसे समाजसेवा का मंच बना दिया। इस विशेष अवसर पर दूल्हा-दुल्हन समेत कुल 14 लोगों ने नेत्रदान का संकल्प लिया और नव दृष्टि फाउंडेशन को अपनी नेत्रदान वसीयत सौंपी। यह कदम न सिर्फ नेत्रहीनों के जीवन में रोशनी लाने की दिशा में सार्थक पहल है, बल्कि समाज में नेत्रदान को लेकर व्याप्त भ्रांतियों को भी तोड़ता है।

नेत्रदान का संकल्प लेने वालों में सूरज गुप्ता, खुशबू गुप्ता, विजय कुमार गुप्ता, अशोक कुमार गुप्ता (दुर्ग), रेखा गुप्ता (दुर्ग), अंजना गुप्ता (नागपुर), सोहनलाल गुप्ता, श्रीमती वंदना गुप्ता, विनय साहू, पूजा साहू, आशीष वास्कले, मयंक शर्मा, प्रानु श्रीवास्तव और गिरीश कुमार साहू शामिल रहे। इन सभी ने नव दृष्टि फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं तरुण आढ़तिया और फानेंद्र जैन के मार्गदर्शन व सहयोग से नेत्रदान की प्रतिज्ञा ली।

इस पुनीत कार्य के लिए समारोह में उपस्थित सभी नेत्रदाताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। मंच पर उन्हें प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी इस मानवीय भावना का सार्वजनिक रूप से अभिनंदन किया गया। नव दृष्टि फाउंडेशन के प्रमुख तरुण आढ़तिया ने कहा कि “जब समाज के युवा अपने जीवन के सबसे खास अवसर पर इस तरह के निर्णय लेते हैं, तो यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनता है। नेत्रदान जैसे विषय पर सामूहिक संकल्प समाज में जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।”

फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि भारत में लाखों लोग कॉर्निया संबंधी बीमारियों के चलते दृष्टिहीनता का शिकार हैं, जिनके लिए नेत्रदान ही एकमात्र आशा की किरण है। लेकिन जागरूकता की कमी और सामाजिक झिझक के चलते अब भी बहुत कम लोग नेत्रदान के लिए आगे आते हैं। ऐसे में इस विवाह समारोह का यह सराहनीय कदम समाज को नेत्रदान के महत्व को समझाने में मददगार सिद्ध होगा।

यह विवाह समारोह न केवल सामाजिक रीति-रिवाजों का प्रतीक था, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन का आरंभ भी बन गया। समारोह में मौजूद लोगों ने इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की और कहा कि इस नवदंपती ने अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत ही एक पुण्य कार्य से करके एक आदर्श प्रस्तुत किया है।

इस प्रेरणादायक कदम ने यह संदेश दिया है कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो हर अवसर को समाज कल्याण का माध्यम बनाया जा सकता है। नेत्रदान जैसा महान कार्य जब विवाह जैसे पावन संस्कार से जुड़ता है, तो यह निश्चित ही समाज को नई दृष्टि देने वाला क्षण बन जाता है।

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