राजनांदगांव पेंड्री एआरटीओ कार्यालय में नामांतरण के नाम पर मनमानी वसूली, चौकीदार बना कैशियर – शासन के राजकोष को हो रहा लाखों का घाटा

राजनांदगांव, पेंड्री स्थित अतिरिक्त क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (एआरटीओ) एक बार फिर सुर्खियों में है। यहां नाम ट्रांसफर (नामांतरण) के नाम पर आवेदकों से अनियमित और अवैध रूप से धन वसूली की जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे गोरखधंधे में कार्यालय का चौकीदार ही कैशियर की भूमिका निभा रहा है, जो न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा भी दर्शाता है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वाहन मालिक जब अपने वाहन का नामांतरण कराने एआरटीओ कार्यालय पहुंचते हैं, तो उन्हें निर्धारित शुल्क के अलावा अतिरिक्त रकम जमा करने के लिए मजबूर किया जाता है। यह राशि किसी भी अधिकृत खिड़की या बैंक में नहीं, बल्कि सीधे एक व्यक्ति को दी जाती है जो वास्तविक रूप से चौकीदार है, लेकिन यहां कैशियर की भूमिका निभा रहा है। वह न तो राजकोष से अधिकृत है और न ही कैश हैंडलिंग की जिम्मेदारी उसके कार्यक्षेत्र में आती है।

यह अवैध प्रक्रिया कई वर्षों से जारी है, लेकिन अब जाकर धीरे-धीरे इसकी परतें खुलने लगी हैं। नामांतरण के प्रकरण में  सरकारी शुल्क के बजाय आवेदकों से अवैध वसूली की जा रही है। इस रकम की कोई रसीद नहीं दी जाती, जिससे यह साफ होता है कि शासन के खजाने में इसका एक पैसा भी नहीं पहुंच रहा।

इस हिसाब से हर महीने लाखों की अवैध वसूली होती है, जो सीधे-सीधे भ्रष्टाचार की श्रेणी में आती है।

कार्यालय में यह भी पाया गया कि कई कर्मचारियों को महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गए हैं, जिनके पास न तो आवश्यक प्रशिक्षण है, न ही अधिकार। चौकीदार जैसे निचले स्तर के कर्मचारी को नकदी का प्रबंधन सौंपना गंभीर लापरवाही है, जिससे सरकारी धन की सुरक्षा पर सवाल उठता है।

स्थानीय नागरिकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह व्यवस्था और भी अधिक भ्रष्टाचार की ओर बढ़ेगी।

राज्य शासन व परिवहन विभाग को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, सभी वित्तीय लेन-देन को डिजिटल माध्यम से संचालित करने का सख्त निर्देश देना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और शासन का राजस्व सुरक्षित रह सके।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि अधिकारियों पर नियंत्रण नहीं रखा गया, तो भ्रष्टाचार निचले स्तर तक फैलता चला जाएगा और इसकी कीमत आम जनता और शासन दोनों को चुकानी पड़ेगी।

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