
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ — एक समय था जब शासकीय जिला अस्पताल बसन्तपुर, राजनांदगांव में लगाए गए वॉटर एटीएम को तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सौगात के रूप में देखा गया था। लगभग एक करोड़ रुपए की लागत से स्थापित यह वॉटर एटीएम मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करने हेतु स्थापित किया गया था। लेकिन अब यह एटीएम खुद लू की चपेट में आ चुका है और प्यासे मरीजों के लिए राहत की जगह एक बेकार ढांचा बनकर रह गया है।
गर्मियों का प्रकोप अपने चरम पर है, और तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है। अस्पताल में इलाज कराने आए सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों को जहां एक ओर इलाज की चिंता है, वहीं दूसरी ओर शुद्ध पानी के लिए भटकना उनकी परेशानियों को दोगुना कर रहा है। अस्पताल परिसर में मौजूद वॉटर एटीएम में न तो पानी उपलब्ध है और न ही यह कार्यरत अवस्था में है। ऊपर से धूल, जंग और टूटी-फूटी स्थिति इस बात का सबूत है कि लंबे समय से इस मशीन की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
वॉटर एटीएम के ऊपर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया है “जल ही जीवन है” और “SAVE WATER”, पर यह संदेश अब केवल एक विडंबना जैसा प्रतीत होता है। नगर पालिक निगम राजनांदगांव की देखरेख में लगे इस एटीएम के सामने एक पाइप और टूटी टंकी जरूर रखी गई है, लेकिन वह भी सूखी है। मरीजों को या तो अपने साथ लाया पानी पीना पड़ता है या फिर बाहर दुकानों से महंगे दाम पर बोतल खरीदनी पड़ती है।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों का कहना है कि जब यह वॉटर एटीएम चालू था, तब इससे प्रतिदिन सैकड़ों लोगों को ठंडा और साफ पानी मिलता था। अब जबकि पानी की सबसे अधिक जरूरत है, यह मशीन पूरी तरह बंद पड़ी है।
प्रशासन और नगर निगम की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। करोड़ों की लागत से स्थापित यह प्रणाली अब देखरेख के अभाव में बेकार होती जा रही है। इस दिशा में ना तो कोई मेंटेनेंस टीम सक्रिय है और ना ही अस्पताल प्रबंधन इस विषय को गंभीरता से ले रहा है।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या सरकारी योजनाएं केवल उद्घाटन और फोटो खिंचवाने तक ही सीमित रह गई हैं? यदि समय रहते इन व्यवस्थाओं की मरम्मत और रखरखाव नहीं किया गया, तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी होगी, बल्कि जनता के विश्वास पर भी आघात होगा।
राजनांदगांव के जिला अस्पताल में लगा यह ‘वॉटर एटीएम’ एक मिसाल बन सकता था कि कैसे सरकारी तंत्र आम जनता को राहत पहुंचा सकता है। परंतु आज यह उपेक्षा और लापरवाही का प्रतीक बनकर खड़ा है। अब देखना होगा कि क्या नगर निगम और जिला प्रशासन इस दिशा में ठोस कदम उठाता है या यह मशीन यूं ही धूल फांकती रहेगी।
