उमरपाल की शादी में झलक उठी आदिवासी संस्कृति: विलुप्त होती मांदरी नृत्य परंपरा ने  सभी का मन मोहा लिया

उमरपाल, जिला मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, 9अप्रैल 2025:
स्थानीय ग्राम उमरपाल में एक पारंपरिक शादी समारोह के दौरान आदिवासी संस्कृति की विलुप्तप्राय परंपरा “मांदरी नृत्य” की झलक देखने को मिली। गांववासियों द्वारा प्रस्तुत इस मोहक नृत्य ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। यह नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक एकता का प्रतीक भी है।

मांदरी नृत्य मुख्य रूप से विशेष अवसरों और उत्सवों पर किया जाता है। इसमें महिलाएं और पुरुष एक-दूसरे का हाथ थामकर कतारबद्ध होकर वृत्ताकार रूप में नृत्य करते हैं। तालबद्ध ढोल-नगाड़ों की धुन पर यह नृत्य एक लयबद्ध आवर्तन के साथ आगे बढ़ता है, जो एक अनोखा समां बांध देता है।

यह नृत्य केवल कला प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसमें गाए जाने वाले गीतों और प्रदर्शन के माध्यम से प्रकृति, जल-जंगल-जमीन और पर्यावरण संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर संदेश दिए जाते हैं। मांदरी नृत्य आदिवासी जीवनशैली, उनके संघर्ष, उनकी एकता और प्रकृति के साथ उनके गहरे संबंध को दर्शाता है।

गांव के बुजुर्गों ने बताया कि मांदरी नृत्य कभी हर पर्व और उत्सव का अनिवार्य हिस्सा होता था, लेकिन आधुनिकता और बदलते सामाजिक ढांचे के कारण यह परंपरा अब धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। नई पीढ़ी में इसे लेकर जागरूकता की कमी और सांस्कृतिक विरासत के प्रति उदासीनता चिंता का विषय है।

वर्तमान समय में जब हम वैश्वीकरण और तकनीकी युग में आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे में इस तरह की सांस्कृतिक परंपराओं को संजोना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। मांदरी नृत्य जैसे नृत्य केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि यह हमारी पहचान और हमारी जड़ों से जुड़े रहने का एक जरिया भी हैं।

समारोह में ग्रामीणों ने अपील की कि स्कूलों, महाविद्यालयों और सांस्कृतिक मंचों पर मांदरी जैसे पारंपरिक नृत्य को बढ़ावा दिया जाए और इसे एक सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में संरक्षित किया जाए।

JOIN WHATSAPP GROUP

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *