
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से आए पंचायत सचिवों ने राज्य शासन की अनदेखी और लंबित मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। यह आंदोलन बिना प्रशासनिक अनुमति के सार्वजनिक स्थल पर चल रहा है, जिससे न केवल स्थानीय नागरिकों को परेशानी हो रही है, बल्कि शासन की कई योजनाएं भी ठप हो गई हैं।

यह हड़ताल संस्कारधानी राजनांदगांव के कलेक्ट्रेट के सामने एक व्यस्त फ्लाईओवर के नीचे चल रही है, जहाँ सैकड़ों की संख्या में पंचायत सचिव सिर पर पट्टी बांधकर बैठ गए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे विगत कई वर्षों से नियमितीकरण, वेतनमान और सेवा सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर शासन से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ है। ऐसे में उन्हें मजबूर होकर हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
हड़ताली सचिवों का आरोप है कि शासन उनकी सेवाओं का भरपूर उपयोग तो करता है, लेकिन उनके हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस नीति नहीं बनाता। पंचायत सचिव संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शासन द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद मांगों की अनदेखी की जा रही है।

बिना अनुमति के चल रही इस हड़ताल पर प्रशासन ने अब तक कोई सख्त रुख नहीं अपनाया है, लेकिन स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। वहीं, पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों, राशन वितरण, ग्रामीण आवास योजनाओं और रोजगार गारंटी जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है।
गांवों से आए कई सरपंचों ने भी चिंता जताई है कि सचिवों की अनुपस्थिति में ग्राम पंचायतों का संचालन रुक गया है। कई ज़रूरी कार्य अटक गए हैं जिससे आम ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, शासन को भी पंचायत स्तर की रिपोर्टिंग और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आ रही है।
राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सरकार इस हड़ताल को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही पंचायत सचिवों से वार्ता कर कोई हल निकालने की कोशिश कर सकती है।
बहरहाल, जब तक यह हड़ताल समाप्त नहीं होती, शासन और आम जनता दोनों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी रहेगी।
