
राजनांदगांव।
कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पं. किशोरी लाल शुक्ल विधि महाविद्यालय, राजनांदगांव द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम, 2013 (POSH Act) के विषय पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन 6 फरवरी 2026 को किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य महाविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को POSH अधिनियम के प्रावधानों, अधिकारों एवं शिकायत निवारण तंत्र की विस्तृत जानकारी प्रदान करना है।
महाविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह जागरूकता कार्यक्रम वर्तमान समय की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया जा रहा है, ताकि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भेदभाव-मुक्त कार्यस्थल की अवधारणा को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। कार्यक्रम में महाविद्यालय के संकाय सदस्य, छात्र-छात्राएं तथा प्रशासनिक अधिकारी बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे।
प्रस्तावित सत्र के दौरान विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा POSH अधिनियम के उद्देश्य, परिभाषा और महत्व पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) की भूमिका, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया, समय-सीमा, गोपनीयता के प्रावधान तथा पीड़िता को प्राप्त कानूनी संरक्षण की जानकारी दी जाएगी। वक्ता यह भी स्पष्ट करेंगे कि लैंगिक उत्पीड़न केवल शारीरिक कृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि मौखिक, लिखित, सांकेतिक या किसी भी प्रकार का अवांछित व्यवहार भी इसके अंतर्गत आता है।
कार्यक्रम में उदाहरणों एवं व्यावहारिक स्थितियों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक संस्थान और उसके प्रत्येक सदस्य की सामूहिक जिम्मेदारी है। साथ ही यह भी बताया जाएगा कि POSH अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन संस्थान की कार्यसंस्कृति को सकारात्मक एवं संवेदनशील बनाता है।
महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों में कानून के प्रति समझ विकसित करने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति भी सजग बनाते हैं। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों में यह विश्वास उत्पन्न करने का प्रयास किया जाएगा कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार के विरुद्ध वे निर्भीक होकर विधिक प्रक्रिया का सहारा ले सकते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर यह संदेश दिया जाएगा कि कानून की जानकारी ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है और POSH अधिनियम महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं न्यायसंगत कार्यस्थल के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महाविद्यालय द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है।
