नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब महंगाई भत्ता 53% से बढ़कर 55% हो गया है। यह वृद्धि 1 जनवरी 2025 से प्रभावी होगी, जिससे देशभर के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
महंगाई भत्ते में वृद्धि क्यों की गई?
महंगाई भत्ता एक प्रकार की वित्तीय सहायता होती है, जिसे सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मुद्रास्फीति के प्रभाव से राहत देने के लिए प्रदान करती है। यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में बदलाव के आधार पर तय किया जाता है। पिछले कुछ महीनों में बढ़ती महंगाई और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, “देश में महंगाई दर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को राहत देने के लिए महंगाई भत्ता 2% बढ़ाने का निर्णय लिया है।”
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को क्या लाभ होगा?
महंगाई भत्ते की इस बढ़ोतरी से देशभर के लगभग 49 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 67 लाख पेंशनर्स को सीधा लाभ मिलेगा। इससे उनके मासिक वेतन और पेंशन में वृद्धि होगी, जिससे वे बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकेंगे।
उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन ₹50,000 है, तो उसे पहले 53% के हिसाब से ₹26,500 महंगाई भत्ता मिलता था। अब 55% महंगाई भत्ते के अनुसार, यह राशि बढ़कर ₹27,500 हो जाएगी। यानी हर महीने ₹1,000 की अतिरिक्त राशि कर्मचारियों को मिलेगी।
अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बाजार में मांग बढ़ेगी क्योंकि सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति में वृद्धि होगी। इससे उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे विभिन्न उद्योगों को लाभ होगा। हालांकि, कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से उसके कुल वित्तीय बोझ में भी वृद्धि होगी।
