सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा का प्रदर्शन, जनक लाल ठाकुर ने कहा – “शिक्षा और संविधान पर हमला है यह कृत्य”

डौंडी लोहारा।
छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा द्वारा शनिवार को शहीद भवन कैम्प-1 से एक विशाल रैली निकालकर जैन भवन चौक होते हुए एसडीएम कार्यालय तक पहुंचकर विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस रैली का मुख्य उद्देश्य समाजसेवी और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई की मांग करना था। रैली में सीजेआई न्यायमूर्ति गवई पर हुए जूते से अमानवीय हमले, दलित-आदिवासियों पर बढ़ते अत्याचार, धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों और स्थानीय जनहित मुद्दों को लेकर नारेबाजी की गई।

एसडीएम कार्यालय पहुंचने पर कोई भी अधिकारी उपस्थित नहीं रहने से प्रदर्शनकारी आक्रोशित हो उठे और कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए। लंबे इंतजार के बाद एसडीएम ने अपना दौरा बीच में छोड़कर लौटकर प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन ग्रहण किया। ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक जनक लाल ठाकुर ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि सोनम वांगचुक एक प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षा सलाहकार और वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने देश के लिए कई उपयोगी आविष्कार किए हैं। ऐसे व्यक्ति को देशद्रोह का दोषी बताकर जेल भेजना लोकतंत्र के लिए कलंक है। उन्होंने कहा कि “यह सरकार की साजिश है, जो पहाड़ों और प्राकृतिक संपदाओं को निजी हाथों में सौंपकर लूट का रास्ता तैयार कर रही है। सोनम वांगचुक जैसे समाजसेवक को कैद करना इसी साजिश का हिस्सा है।”

जनक लाल ठाकुर ने सीजेआई गवई पर हुए हमले की तीव्र निंदा करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय के जज पर जूते से हमला मनुवादी विचारधारा से प्रेरित एक अमानवीय कृत्य है। उन्होंने कहा, “यह केवल व्यक्ति पर नहीं बल्कि शिक्षा और संविधान पर हमला है। हम ऐसे कृत्य की कड़ी भर्त्सना करते हैं और मांग करते हैं कि दोषियों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।”

उन्होंने आगे कहा कि पिछले एक दशक में दलितों, आदिवासियों और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर हमले तेजी से बढ़े हैं। ऐसे मामलों में अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण मिलता है, जिससे उनके हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर सरकार को सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए ताकि समाज में न्याय और समानता की भावना बनी रहे।

धरने में स्थानीय मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। जनक लाल ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार स्मार्ट बिजली मीटर के नाम पर जनता से दुगना-तिगुना बिल वसूल रही है। उन्होंने कहा, “यह बिजली कंपनियों के लिए लूट का रास्ता खोलने जैसा है। हम मांग करते हैं कि बढ़े हुए बिलों की वसूली तत्काल रोकी जाए।”

इसके साथ ही उन्होंने अति-वृष्टि और ओला-वृष्टि से प्रभावित किसानों को फसल का उचित बीमा मुआवजा दिलाने की भी मांग की। ठाकुर ने कहा कि “किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन बीमा कंपनियां और प्रशासन इस दिशा में उदासीन हैं।”

धरना स्थल पर जामड़ी पाट की वनभूमि विवाद का मुद्दा भी उठाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि लमती पंचायत के आश्रित ग्राम तुएगोंदी को सामुदायिक पट्टा देने के बजाय मंदिर के नाम पर संत बालकदास को पट्टा देने की सरकारी साजिश रची जा रही है। उन्होंने इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

जनक लाल ठाकुर ने आगे कहा कि प्रदेश सरकार जनता को शराब की लत में धकेल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि “विष्णुदेव साय सरकार लोगों को नशे में डुबोकर उन्हें मूलभूत मुद्दों से भटका रही है। बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है, सरकारी नौकरियां खत्म की जा रही हैं और निजी क्षेत्र में भी स्थानीय युवाओं के साथ छल हो रहा है।”

धरना स्थल पर जनक लाल ठाकुर के साथ रामचरण नेताम, राजाराम बरगद, बिहारी ठाकुर, ललन साहू, देवेन्द्र उइक, संतोष घराना, कुंभकरण पिस्दा, संत राम ठाकुर, विनोद मिश्रा, रामदीन गुप्ता, प्रमोद कावले, मुकेश मांझी, छबीला कोरम, संगीता, ममता मंडावी, सुमन उइके, हेमंत कांडे, श्रीराम, राजू साहू, टोमन, भूपेंद्र, हितेश सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए।

संगठनों में छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ माईंस श्रमिक संघ, जन मुक्ति मोर्चा, सीटू यूनियन, गोंडवाना समाज, बौद्ध समाज, हल्बा समाज और संयुक्त मोर्चा की सक्रिय भागीदारी रही।

सभा के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि सरकार ने इन मांगों पर त्वरित कार्यवाही नहीं की, तो आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ के सभी सामाजिक संगठनों और मजदूर संघों को साथ लेकर राज्यव्यापी उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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