छत्तीसगढ़ राज्य रजत जयंती समारोह : पंडित किशोरी लाल शुक्ल विधि महाविद्यालय में विज़न 2050 भाषण प्रतियोगिता का भव्य आयोजन

विजेता सिंह ठाकुर – बहुआयामी विज़न 2050

कार्यक्रम की शुरुआत 1st ईयर की छात्रा विजेता सिंह ठाकुर ने अत्यंत प्रभावशाली भाषण देते हुए कहा कि 2050 का छत्तीसगढ़ केवल एक कल्पना नहीं बल्कि एक संकल्प है। उन्होंने कई बिंदुओं पर विस्तार से अपने विचार रखे:

प्रतियोगिता में 1st ईयर की छात्रा विजेता सिंह ठाकुर ने “2050 में हमारा छत्तीसगढ़ कैसा होना चाहिए” विषय पर अपनी बात रखते हुए शिक्षा स्तर को बढ़ावा देने, कौशल विकास, औद्योगीकरण और व्यापार के विस्तार, बेहतर चिकित्सा सुविधा, रेल, सड़क एवं वायुमार्ग के सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद को हम खत्म कर सकते हैं लेकिन उसकी विचारधारा को समाप्त करना कठिन है। उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने, सभी फसलों को समर्थन मूल्य प्रदान करने, पर्यटन में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने तथा छत्तीसगढ़ी भाषा-बोली पर गर्व करते हुए उसका सम्मान करने की अपील की।

शिक्षा और कौशल: गाँव-गाँव में पुस्तकालय, डिजिटल स्कूल और स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित हों।

औद्योगीकरण: खनिज संपदा का सही उपयोग कर छोटे-बड़े उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए।

स्वास्थ्य सेवा: हर जिले में उच्च स्तरीय अस्पताल और मेडिकल कॉलेज हों, ताकि गरीबों को मुफ्त चिकित्सा मिल सके।

परिवहन: रेल, सड़क और वायुमार्ग से हर गाँव को जोड़ा जाए।

कृषि: सभी फसलों का समर्थन मूल्य सुनिश्चित हो और जैविक खेती को बढ़ावा मिले।

पर्यटन: बस्तर, सिरपुर और अन्य धरोहर स्थलों को विश्वस्तरीय पहचान दिलाई जाए।

नक्सलवाद: इसे समाप्त करने के लिए शिक्षा और संवाद ही स्थायी उपाय है।

भाषा-बोली: छत्तीसगढ़ी भाषा पर गर्व होना चाहिए, इसे बोलने में किसी को हिचकिचाना नहीं चाहिए।

उन्होंने कहा—
“जब सोच बड़ी हो, दिशा स्पष्ट हो और जन-जन की भागीदारी सुनिश्चित हो, तभी विकास की गारंटी है। विज़न 2050 में छत्तीसगढ़ आत्मनिर्भर, शिक्षित, औद्योगिक और गौरवशाली राज्य बनेगा।”

खुशी शर्मा – शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का सपना

भाषण प्रतियोगिता की शुरुआत 2nd ईयर की छात्रा खुशी शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि यदि 2050 में छत्तीसगढ़ को अंजोर (प्रकाशमय) राज्य बनाना है तो सबसे पहले शिक्षा को आधार बनाना होगा। उन्होंने विशेष रूप से महिला शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। खुशी शर्मा ने कहा कि जब तक बेटियाँ आत्मनिर्भर नहीं होंगी, तब तक समाज आधा अधूरा रहेगा। उन्होंने ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की पहुंच, डिजिटल शिक्षा, और महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं खेती, उद्योग और प्रशासन हर क्षेत्र में योगदान दे सकती हैं, यदि उन्हें उचित अवसर मिले।

विधि बक्शी – पर्यावरण और हरित छत्तीसगढ़

3rd ईयर की छात्रा विधि बक्शी ने पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा और जल देना है तो आज से ही वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर ध्यान देना होगा। उन्होंने “ग्रीन छत्तीसगढ़” का नारा देते हुए कहा कि 2050 में हर गाँव और हर शहर वृक्षों से आच्छादित हो, नदियाँ स्वच्छ हों और ऊर्जा का अधिकतर हिस्सा सौर और पवन ऊर्जा से प्राप्त हो।

आशुतोष सिंह – छत्तीसगढ़ी भाषा में ‘अंजोर छत्तीसगढ़’

आशुतोष सिंह ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपने विचार रखकर सभा का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा—
“अंजोर छत्तीसगढ़ के बात ल सिरिफ कागज म नइ लिखे बर बने, ए संकल्प हे। जब सोच बड़े, दिशा साफ हो, अउ जन जन के भागीदारी होही, त विकास लेकन रोक नई सकय।”
उन्होंने मेडिकल कॉलेज, उद्योग, तकनीकी शिक्षा, बिजली व्यवस्था, सड़क और पर्यटन स्थलों के विकास को छत्तीसगढ़ के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग बताया।

मनीष – सामाजिक समरसता और युवा शक्ति

फाइनल ईयर के छात्र मनीष ने अपने विचार रखते हुए कहा कि 2050 का छत्तीसगढ़ तभी विकसित होगा जब समाज जात-पात और भेदभाव से ऊपर उठेगा। उन्होंने सामाजिक समरसता और भाईचारे को राज्य की सबसे बड़ी शक्ति बताया। मनीष ने कहा कि युवाओं को रोजगार और स्टार्टअप के अवसर देकर आत्मनिर्भर बनाया जाए। उनका मानना है कि युवा ही छत्तीसगढ़ को नई दिशा देंगे।

दुलेश्वर साहू – ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर गाँव

दुलेश्वर साहू ने कहा कि यदि 2050 का छत्तीसगढ़ विकसित देखना है तो ग्रामीण विकास को केंद्र में रखना होगा। हर गाँव में पक्की सड़क, स्वच्छ पानी, आधुनिक शिक्षा और रोजगार के साधन होने चाहिए। उन्होंने “आत्मनिर्भर गाँव – समृद्ध छत्तीसगढ़” का नारा दिया और कहा कि जब गाँव मजबूत होंगे तभी पूरा राज्य प्रगति करेगा।

अपूर्व श्रीवास्तव – तकनीकी नवाचार और डिजिटल छत्तीसगढ़

1st ईयर के छात्र अपूर्व श्रीवास्तव ने विज़न 2050 पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को तकनीकी रूप से अत्याधुनिक राज्य के रूप में पहचान दिलानी होगी। उन्होंने कहा कि—

डिजिटल गवर्नेंस: प्रत्येक गाँव और शहर में डिजिटल सुविधा केंद्र हों, जहाँ नागरिक अपने सभी शासकीय कार्य ऑनलाइन कर सकें।

स्टार्टअप और आईटी सेक्टर: युवाओं को आईटी सेक्टर और स्टार्टअप से जोड़कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएँ।

स्मार्ट सिटी और स्मार्ट विलेज: छत्तीसगढ़ में केवल शहर ही नहीं, गाँव भी स्मार्ट होने चाहिए, जहाँ ई-लाइब्रेरी, वाई-फाई जोन और तकनीकी शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स: उन्होंने कहा कि 2050 तक छत्तीसगढ़ को शिक्षा और उद्योग क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और नई तकनीकों को अपनाना चाहिए, ताकि राज्य वैश्विक प्रतिस्पर्धा में खड़ा हो सके।

ई-हेल्थ और टेलीमेडिसिन: अपूर्व श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य सेवा में तकनीकी उपयोग पर बल देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, जिससे कोई भी मरीज बिना बड़े खर्च के विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श ले सके।

उन्होंने अंत में कहा कि—
“2050 का छत्तीसगढ़ तकनीक और परंपरा का संगम होगा। जहां गांव-गांव तक डिजिटल सेवाएं पहुंचेंगी, वहीं हमारी संस्कृति और मूल्य भी उतने ही मजबूत रहेंगे। यही सच्चा अंजोर छत्तीसगढ़ होगा।”

कार्यक्रम का सफल संचालन प्राध्यापक श्री अतुल सोनी ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. निमिषा मिश्रा की विशेष उपस्थिति ने सभा को और गरिमामयी बना दिया। उन्होंने अपने उद्बोधन में छत्तीसगढ़ महतारी के महत्व और यहां की भाषा-बोली के गौरव पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित सभी विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को छत्तीसगढ़ राज्य रजत जयंती की शुभकामनाएं प्रेषित कीं।        

कार्यक्रम के अंत में फाइनल ईयर के छात्र मनीष ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।

2050 का छत्तीसगढ़ न केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त होगा, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी देश का आदर्श राज्य बनेगा।

यह आयोजन केवल एक भाषण प्रतियोगिता नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों की सोच और भविष्य की रूपरेखा की झलक था। खुशी शर्मा के महिला सशक्तिकरण, विजेता सिंह ठाकुर के बहुआयामी विज़न, विधि बक्शी के पर्यावरणीय दृष्टिकोण, आशुतोष सिंह के छत्तीसगढ़ी भाषा में संकल्प, मनीष के सामाजिक समरसता और दुलेश्वर साहू के ग्रामीण विकास के विचारों ने मिलकर छत्तीसगढ़ के भविष्य की एक सशक्त तस्वीर प्रस्तुत की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *