
राजनांदगांव।
निजी अस्पतालों की मनमानी और लूटखसोट के खिलाफ फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी ने मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष श्री शिव शंकर सिंह ने जिले के कलेक्टर महोदय से सीधा संवाद कर कहा कि अब हम संविधानिक उपचार अनुच्छेद 32 के तहत विधिक कार्रवाई के लिए बाध्य हैं, क्योंकि कार्यपालिका के सर्वोच्च अधिकारी जिलाधीश और पूंजीपति कॉरपोरेट व राजनीतिक दलों के नेताओं के संरक्षण में निजी अस्पतालों का यह व्यापार फल-फूल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि निजी अस्पतालों की लापरवाही और मुनाफाखोरी से आम जनता त्रस्त हो चुकी है। इसकी शिकायतें बार-बार प्रशासन को सौंपी गईं, लेकिन न तो अस्पताल संचालकों पर और न ही स्वास्थ्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नेतराम नवरत्न पर कोई ठोस कार्रवाई की गई। श्री सिंह ने कहा कि यह स्थिति जनता के स्वास्थ्य और जीवन के साथ खिलवाड़ है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कलेक्टर को अवगत कराया कि संजीवनी अस्पताल के अलग-अलग पाँच मामले सामने आए हैं, जिनकी जांच तत्काल की जानी चाहिए। इसी प्रकार दीक्षित मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल राजनांदगांव पर भी कार्रवाई की मांग की गई है। श्री सिंह का कहना है कि प्रदेश समिति के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद डॉ. नेतराम नवरत्न ने अपने पदेन कर्तव्यों का पालन नहीं किया। समिति ने 7 दिनों के भीतर संजीवनी अस्पताल पर कार्रवाई करने का लिखित आदेश दिया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो उनकी पार्टी विधिक लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने मांग की कि डॉ. नेतराम नवरत्न पर भारतीय दंड संहिता की धारा 223 के अंतर्गत निलंबन की कार्रवाई की जाए, उनकी संपत्ति की जांच हो और रिकवरी सूट चलाया जाए।
श्री सिंह ने कहा कि जब तक इस प्रकार के भ्रष्टाचार और लापरवाही पर रोक नहीं लगाई जाएगी, तब तक जनता को राहत नहीं मिलेगी। निजी अस्पतालों की लूट से आम लोग आर्थिक और मानसिक रूप से टूट रहे हैं। मरीजों से मनमाने ढंग से लाखों रुपये वसूलना और गंभीर मामलों में इलाज में लापरवाही अब खुलेआम हो रही है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कलेक्टर महोदय इस पर तुरंत संज्ञान लेकर कार्रवाई नहीं करते, तो आगे उनके ऊपर भी संवैधानिक और विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम से जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनता की उम्मीद प्रशासन से है कि वह निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में जनता का विश्वास बना रहे और निजी अस्पताल मौत का सौदा करने की जगह मरीजों के लिए जीवनदायी सिद्ध हों।
