
राजनांदगांव।
कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन के संयोजक शिवशंकर सिंह ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आज समाज और शासन-प्रशासन में नैतिकता, संवेदना, गरिमा और जिम्मेदारी जैसे मूल्य कहीं खोते जा रहे हैं। यह स्थिति न केवल आम नागरिकों के लिए चिंताजनक है, बल्कि शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
श्री सिंह ने कहा कि पदीय कर्तव्यों की उपेक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में लापरवाही का असर हर क्षेत्र में दिखाई देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनांदगांव पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग द्वारा हाल में उठाए गए सकारात्मक कदमों से उम्मीद जगी है, परंतु सवाल यह है कि बाकी विभाग कब जागेंगे या फिर किसी गंभीर हादसे का इंतजार करेंगे।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, कृषि, आवकारी, यातायात, पशुपालन, पर्यावरण, जल संसाधन, पीडब्ल्यूडी, राजस्व, नगर निगम, ग्राम पंचायत और श्रम विभाग सहित राज्य और केंद्र के कुल 109 विभाग कार्यरत हैं। ये सभी जिलाधीश और जिला कलेक्टर के अधीन होते हैं। इसके बावजूद, आम नागरिक केवल पुलिस प्रशासन से ही सुरक्षा और व्यवस्था की उम्मीद क्यों करें?
श्री सिंह का कहना है कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं राज्य के दायरे में आती हैं। लेकिन जब इन क्षेत्रों में लापरवाही होती है तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। प्रतिवर्ष हजारों पुलिसकर्मी और लाखों नागरिक सीधे टकराव, दुर्घटनाओं और विभागीय लापरवाही का शिकार हो जाते हैं। क्या यह केवल पुलिस का दायित्व है कि वह संविधान की रक्षा करे?
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 51 में नागरिकों के मूल कर्तव्यों और अनुच्छेद 36 से 51 में निहित नीति-निदेशक तत्वों का हवाला देते हुए कहा कि इनका पालन केवल पुलिस या फोर्स की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर विभाग, संगठन, राजनीतिक दल और नागरिक की भी है।
श्री सिंह ने अपील की कि देश में आदर्श समाज, आदर्श गांव, आदर्श शहर और आदर्श राज्य बनाने के लिए सभी को अपने-अपने पदीय और नैतिक कर्तव्यों का पालन करना होगा। केवल आरोप-प्रत्यारोप से समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने सुझाव दिया कि इस दिशा में पहल छत्तीसगढ़ के दुर्ग संभाग के राजनांदगांव जिले से होनी चाहिए, जिसे संस्कार धानी के रूप में जाना जाता है। यहां जिला प्रमुख पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग और जिलाधीश सर्वेश्वर दाश भूरे के नेतृत्व में एक जिला, ब्लॉक और तहसील स्तरीय निगरानी एवं कर्तव्य पालन समिति बनाई जाए। इस समिति में राजपत्रित अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित हो।
अंत में उन्होंने कहा कि यदि हर विभाग और संगठन अपने कर्तव्यों का पालन जिम्मेदारी से करे, तो एक आदर्श व्यवस्था और बेहतर भविष्य का निर्माण संभव है। यह केवल पुलिस या फोर्स की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
