पुलिस प्रशासन और जनता आमने-सामने – दोषी कौन?

कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन के संयोजक शिवशंकर सिंह ने चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि जब भी कोई घटना या दुर्घटना घटित होती है तो पुलिस प्रशासन और जनता आमने-सामने खड़े दिखाई देते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि हमेशा पुलिस और जनता ही टकराव की स्थिति में पहुँचते हैं जबकि कई बार इसके पीछे अन्य विभागों की लापरवाही होती है।

श्री सिंह का कहना है कि पुलिस का मुख्य कार्य जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। लेकिन जब अन्य विभाग अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं निभाते, तो उसका सीधा प्रभाव पुलिस की साख पर पड़ता है और जनता पुलिस को ही दोषी ठहराने लगती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ प्रदेश में अनेक होटलों और लॉज में जुआ, सट्टा, शराब और अवैध गतिविधियाँ धड़ल्ले से चल रही हैं। शराब की बिक्री पर आबकारी विभाग की जिम्मेदारी है, लेकिन उसकी लापरवाही और संरक्षण के कारण युवा पीढ़ी नशे की गिरफ्त में आकर चोरी, लूट, चाकूबाजी और बलात्कार जैसी घटनाओं को अंजाम देती है। इसका दोष पुलिस पर मढ़ दिया जाता है जबकि असली जिम्मेदार आबकारी विभाग और उसके अधिकारी होते हैं।

इसी प्रकार, स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के कारण निजी अस्पतालों में लूट और लापरवाही चरम पर है। जब किसी दुर्घटना या इलाज में गड़बड़ी होती है तो पीड़ित परिवार और पुलिस आमने-सामने आ जाते हैं। लेकिन इस स्थिति के लिए स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ही जिम्मेदार होती है। शिक्षा क्षेत्र में भी यही स्थिति देखने को मिलती है, जहाँ शिक्षा अधिकारियों की उदासीनता के कारण अनेक समस्याएँ उत्पन्न होती हैं, लेकिन जिम्मेदारी उन पर तय नहीं की जाती।

शिवशंकर सिंह ने यातायात व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सड़क पर ओवरलोडेड वाहन चलते हैं, सड़कें खराब होती हैं और आमजन दुर्घटनाओं का शिकार बनते हैं। इसके लिए सीधे तौर पर पीडब्ल्यूडी विभाग, यातायात विभाग और नापतौल विभाग जिम्मेदार होते हैं। लेकिन इनकी जवाबदेही तय करने की बजाय पुलिस प्रशासन पर ही सवाल उठाए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इन सभी उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि पुलिस प्रशासन की साख अन्य विभागों की लापरवाहियों का शिकार बन चुकी है। पुलिस दिन-रात बारिश, धूप और ठंड में अपनी जान की परवाह किए बिना जनता की सुरक्षा में डटी रहती है। इसके बावजूद जनता पुलिस को ही अपना दुश्मन मानने लगती है, जो उचित नहीं है।

आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष राज बारमाटे ने कहा कि संगठन प्रदेशभर में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और पुलिस प्रशासन के बीच संवाद कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसका उद्देश्य जनता और पुलिस प्रशासन के बीच विश्वास एवं सहयोग की भावना स्थापित करना होगा ताकि पुलिस को समाज में वह सम्मान मिल सके जिसकी वे वास्तविक हकदार हैं।

पुलिस केवल कानून-व्यवस्था की प्रहरी ही नहीं बल्कि अन्य विभागों की अनदेखी और भ्रष्टाचार के बीच जनता के साथ खड़े होकर न्याय दिलाने का कार्य भी करती है। अतः समाज और नागरिकों का कर्तव्य है कि वे पुलिस प्रशासन को सम्मान की दृष्टि से देखें और सहयोग प्रदान करें।

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