
मोहला/राजनांदगांव। जिले में किसानों के बीच चर्चित उर्वरक “काला हीरा” को लेकर उठ रहा विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, इस उर्वरक की बिक्री में न केवल भारी विसंगतियाँ हैं बल्कि नकली उत्पाद, बिलिंग गड़बड़ी और केंद्र सरकार के राजपत्र का भी खुला उल्लंघन सामने आया है। इससे नाराज किसानों ने हड़ताल की चेतावनी देते हुए कृषि विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बिल और उत्पाद में गड़बड़ी
किसान शिवशंकर ने आरोप लगाया कि उन्हें चंद्र कृषि केंद्र से खरीदे गए उर्वरक का बिल तो मिला, लेकिन उस पर विक्रय लाइसेंस का उल्लेख नहीं था। इसके अलावा पैकेट पर निर्माता कंपनी फार्मर बायोग्राफी साइंस दर्ज थी, जबकि बॉक्स पर आवक एग्रो लाइफ साइंस का नाम लिखा हुआ था। इतना ही नहीं, टैक्स इनवॉइस भी आवक एग्रो लाइफ साइंस के नाम से जारी किया गया। इस तरह पैकेट, बॉक्स और बिल—तीनों में भिन्नता होने से किसानों ने उत्पाद की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं।
राजपत्र का उल्लंघन
किसानों ने आरोप लगाया कि 16 जून 2025 के बाद “काला हीरा” की बिक्री पर केंद्र सरकार के राजपत्र द्वारा रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद 24 जुलाई 2025 को इनवॉइस नंबर 541 और ई-वे बिल नंबर 821557177270 पर इसकी बिक्री की गई। किसानों का कहना है कि यह सीधे-सीधे राजपत्र की अवहेलना है और बिना विभागीय मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता।
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं
किसानों ने बताया कि उन्होंने 30 जुलाई 2025 को उर्वरक निरीक्षक को शिकायत सौंपी थी, लेकिन निरीक्षक अनुपस्थित रहे और कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 4 अगस्त को यह मामला कृषि मंत्रालय, नई दिल्ली और कृषि विभाग छत्तीसगढ़ तक पहुँचाया गया। साथ ही 18 अगस्त को भारतीय किसान यूनियन के विधिक सलाहकार अधिवक्ता महेंद्र कुमार साहू ने कलेक्टर एवं उप संचालक कृषि को भी शिकायत भेजी। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
कंपनी का पक्ष
दूसरी ओर, एपीके एग्रो लाइफ साइंस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि “काला हीरा” उत्पाद संचनालय कृषि छत्तीसगढ़ शासन रायपुर से प्रमाणित (प्रमाणपत्र संख्या 143/2022) है और यह प्रतिबंध के बाद भी वैध है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि वे नकली उत्पादों के खिलाफ कदम उठाने और किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
किसानों की चेतावनी – धरना-हड़ताल की तैयारी
मामले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज़ भारतीय किसान यूनियन की मोहला-मानपुर जिला इकाई ने अब आंदोलन की राह पकड़ने का एलान किया है। जिला अध्यक्ष कौशल देशमुख ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कृषि विभाग मोहला के सामने अनिश्चितकालीन धरना-हड़ताल शुरू किया जाएगा। यूनियन का कहना है कि कृषि विभाग की लापरवाही से ही यह स्थिति उत्पन्न हुई है, इसलिए आंदोलन के दौरान धरना-प्रदर्शन पर होने वाले खर्च का भार भी विभाग को ही उठाना होगा।
किसान नेताओं ने साफ कहा है कि यदि हड़ताल के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना या अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी कृषि विभाग प्रशासन की होगी।
लगातार गहराते इस विवाद ने न केवल किसानों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि कृषि विभाग इस विवाद को लेकर कब और कैसी कार्रवाई करता है।
