खिलौरा में मौत का प्लांट: स्थानीय हितों को नजरअंदाज कर धड़ल्ले से चल रहा कीटनाशक फैक्ट्री, NGT नियमों की उड़ाई गई धज्जियां, अब पत्रकारों को दबाने-धमकाने की कोशिश

रायपुर के गांव खिलौरा में स्थित एवीके कीटनाशक दवाई निर्माण फैक्ट्री ग्रामीणों की सेहत और जीवन पर संकट बन चुकी है। लगातार शिकायतों और विरोध के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। फैक्ट्री से निकलने वाला धूल और धुआं ग्रामीणों को बीमार कर रहा है। वहीं, फैक्ट्री 50 और 100 मीटर की दूरी पर स्थित होने के बावजूद एनजीटी के नियमों की खुली अवहेलना कर रही है।

प्रमुख बिंदु:

1. पर्यावरणीय एवं NGT नियमों का खुला उल्लंघन
नियमों के अनुसार हीटिंग ब्लॉक प्लांट आबादी से 500 मीटर दूर होना चाहिए, लेकिन एवीके प्लांट महज 50-100 मीटर की दूरी पर स्थित है। यह नियम किसी भी हालत में जानलेवा साबित हो सकता है।

2. स्थानीयों पर स्वास्थ्य का गंभीर असर
प्लांट से निकलने वाली धूल से गांव के लोग सांस की बीमारियों, एलर्जी और फेफड़ों की समस्याओं से जूझ रहे हैं। बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

3. अधिकारियों व जिम्मेदारों को शिकायतें बेअसर
कृषि विभाग और पर्यावरण विभाग को शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। जिम्मेदार विभागीय अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।

पत्रकारों को धमकाने की कोशिश

अब सच दिखाने वाले पत्रकारों पर दबाव डालने और उन्हें धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे सच्चाई सामने न आ पाए।

विभागीय शिकायतें और संज्ञान

कृषि विभाग में लेखी और ऑनलाइन दोनों तरह से शिकायतें पहुंचाई गई हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग ने आश्वासन दिया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई।

भारतीय किसान यूनियन की चेतावनी

भारतीय किसान यूनियन के विधिक सलाहकार अधिवक्ता महेंद्र साहू एवं तकनीकी सलाहकार श्री शिव शंकर सिंह ने जानकारी दी है कि यदि अधिकारियों द्वारा तीन दिवस के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो रायपुर के कृषि सचिवालय और उपसंचालक कृषि रायपुर का घेराव किया जाएगा।

आम जनता की जान को खतरा

पूरे गांव की सेहत खतरे में है। नियमों की अनदेखी कर चल रहे इस प्लांट से ग्रामीणों की जिंदगी और पर्यावरण दोनों पर संकट मंडरा रहा है। धूल, धुआं और प्रदूषण ने जीवन को असहनीय बना दिया है।

जिम्मेदारों की नींद

लगातार शिकायतों और मीडिया रिपोर्टिंग के बावजूद जिम्मेदार विभाग व प्रशासन निष्क्रिय है। अब ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

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