
अंबागढ़ चौकी।
आतरगांव सहकारी समिति के अंतर्गत आने वाले किसानों ने शासन द्वारा स्वीकृत राशि से निर्माण कार्य अन्य स्थान पर कराने के खिलाफ जोरदार विरोध जताया है। धान खरीदी केन्द्र आतरगांव के लिए शासन द्वारा लगभग 25 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है और इसका टेंडर भी आतरगांव के नाम से जारी हो चुका है। इसके बावजूद इस निर्माण कार्य को आतरगांव से लगभग आठ किलोमीटर दूर आड़ेझर में करवाने की तैयारी चल रही है। इस संभावित बदलाव ने किसानों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।

किसानों का कहना है कि यदि निर्माण आतरगांव के बजाय आड़ेझर में किया गया तो उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होगी। वैसे भी खाद की समस्या को लेकर किसान पहले से ही परेशान हैं और अब यह नया विवाद उनकी मुश्किलों को और बढ़ा देगा। किसानसभा के सदस्यों का कहना है कि यह सीधे-सीधे आतरगांव सोसायटी के किसानों के साथ अन्याय है।
प्रबंधन की ओर से दिए गए तर्कों में कहा गया कि आतरगांव में धान खरीदी हेतु पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है, इसलिए निर्माण आड़ेझर में करने पर विचार हुआ। हालांकि, किसानों ने इस दावे को गलत बताया। किसानों ने स्पष्ट किया कि आतरगांव में पहले ही करीब तीन एकड़ शासकीय भूमि धान खरीदी केन्द्र के लिए उपलब्ध कराई जा चुकी है। यह भूमि पक्की सड़क से सटी हुई है और यहां पर पहले से ही चार चबूतरे का निर्माण हो चुका है। ऐसे में जगह की कमी का सवाल ही नहीं उठता।
किसानों ने यह भी कहा कि यह पूरा मामला केवल आतरगांव की स्वीकृत राशि को आड़ेझर स्थानांतरित करने की साजिश है। यदि ऐसा होता है तो आतरगांव के किसानों को बार-बार शोषण का शिकार होना पड़ेगा। किसानसभा ने साफ चेतावनी दी है कि यदि स्वीकृत राशि का उपयोग आतरगांव में ही नहीं किया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
सभा में मौजूद सैकड़ों किसानों ने एकमत होकर निर्णय लिया कि धान खरीदी केन्द्र का निर्माण केवल आतरगांव में ही होना चाहिए। उन्होंने सोसायटी प्रबंधन और समिति के प्रतिनिधियों से मांग की कि जल्द से जल्द आतरगांव में ही निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाए। किसानों का कहना है कि शासन और प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और उनकी मांगों को तत्काल स्वीकार करना चाहिए।
इस सभा में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे और सभी ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए कहा कि किसानों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी। किसानसभा ने यह भी कहा कि वे किसी भी कीमत पर आतरगांव की राशि आड़ेझर में उपयोग नहीं होने देंगे। यदि प्रशासन और सोसायटी प्रबंधन ने उनकी मांगों की अनदेखी की तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे और इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों और प्रबंधन की होगी।
इस विरोध सभा से यह साफ संदेश गया है कि आतरगांव के किसान अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने को तैयार हैं। शासन द्वारा स्वीकृत 25 लाख रुपये की राशि का उपयोग केवल आतरगांव में ही होना चाहिए, अन्यथा किसानों का यह आंदोलन बड़े स्तर पर उभर सकता है।
