
राजनांदगांव। जिले में खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अवैध रूप से राशन दुकानों का आबंटन किए जाने और महिला स्वसहायता समूहों के सशक्तिकरण को कमजोर करने के आरोपों ने मामले को तूल दे दिया है। इस मुद्दे को लेकर उत्तर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आसिफ अली ने अतिरिक्त कलेक्टर सी.एल. मार्कंडेय को ज्ञापन सौंपा और तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
आसिफ अली ने आरोप लगाया कि जिले में राशन दुकानों के आबंटन में भारी गड़बड़ियां हो रही हैं। पीडीएस कंट्रोल ऑर्डर 2016 की धज्जियां उड़ाते हुए भाजपा नेताओं के दबाव और इशारे पर अवैध तरीके से दुकानों का आबंटन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्टेशनपारा वार्ड नंबर 11 में संचालित राशन दुकान (आईडी नंबर 421001008), जो पहले जनता कल्याण खाद्य सुरक्षा पोषण एवं उपभोक्ता समिति के अंतर्गत दी गई थी, उसे नियमों की अनदेखी करते हुए लक्ष्मी नारायण स्वयं सहायता समूह को आवंटित कर दिया गया। जबकि यह समूह न तो स्थानीय है और न ही इसकी पात्रता बनती है।
स्थानीय जागरूक महिला समूहों ने पहले ही दुकान के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर राजनीतिक दबाव और कथित आर्थिक लेनदेन के आधार पर यह आबंटन कर दिया गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की योजनाओं को भी कमजोर करता है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आसिफ अली के साथ आईटी सेल शहर अध्यक्ष मयंक सोनी, धीरज रामटेके, मोनिश साहू, जितेंद्र साहू सहित बड़ी संख्या में वार्डवासी मौजूद रहे। इस मौके पर उपस्थित कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राशन दुकानों का मुद्दा सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह जीवनरेखा जैसा है, ऐसे में भ्रष्टाचार बर्दाश्त से बाहर है।
आसिफ अली ने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार और भाजपा नेताओं का हस्तक्षेप नहीं रुका, तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे, यह कांग्रेस की प्राथमिकता है। लेकिन यदि जनता के अधिकारों पर चोट की गई तो हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
एडीएम सी.एल. मार्कंडेय ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए। कांग्रेस ने विश्वास जताया कि निष्पक्ष जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरे मामले ने जिले की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। खाद्य विभाग की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगने से आमजन में असंतोष बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने भाजपा नेताओं की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है क्योंकि यह सीधे तौर पर जनता के हक और अधिकार से जुड़ा हुआ है।
