
रायपुर।
कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन, संघ भारत ने सोमवार 18 अगस्त 2025 को एक अहम राजनीतिक-सामाजिक घोषणा करने का निर्णय लिया है। इस दिन संगठन छत्तीसगढ़ गणराज्य के प्रदेश अध्यक्ष की आधिकारिक घोषणा करेगा। यह कदम संगठन के दूसरे चरण के विस्तार की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी जिलों में जन-जागरूकता और संगठनात्मक मजबूती स्थापित करना है।
संगठन ने बताया कि नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी कि वे छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में दिसंबर 2026 तक संविधान और किसान का कोड़ा जैसे राष्ट्रीय ग्रंथों पर आधारित जागरूकता अभियान को व्यापक स्तर पर चलाएं। इस अभियान के अंतर्गत आचार्य सूरज राही जी की कथा, संविधान प्रदर्शनी और किसान का कोड़ा मेला का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों के माध्यम से आम जनता को संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों और अभिव्यक्ति की आज़ादी के महत्व से अवगत कराया जाएगा।
संगठन का मानना है कि जब नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह जागरूक होंगे, तब वे न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका के कार्यों का मूल्यांकन स्वयं कर सकेंगे। इस प्रक्रिया से आम नागरिक सरकार से सीधे सवाल पूछ पाएंगे और लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी वास्तविक भागीदारी निभा सकेंगे।
संगठन के प्रवक्ताओं का कहना है कि इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण सोच यह है कि प्रदेश का आम नागरिक ही सबसे बड़ा मालिक है। जो भी जनप्रतिनिधि, अधिकारी या कर्मचारी वेतन और मानदेय पाते हैं, वे जनता के सेवक हैं। इसलिए हर नागरिक को यह अधिकार है कि वह अपनी आवाज बुलंद करे, नीतियों का मूल्यांकन करे और अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए सरकार को जवाबदेह बनाए।
इस घोषणा को लेकर प्रदेशभर में संगठन के कार्यकर्ताओं में उत्साह है। संगठन का दावा है कि आने वाले महीनों में हर जिले में कार्यकर्ताओं का नेटवर्क खड़ा किया जाएगा, ताकि गांव-गांव और शहर-शहर तक यह संदेश पहुंच सके।
विशेष रूप से किसान का कोड़ा ग्रंथ और संविधान प्रदर्शनी को केंद्र में रखकर आयोजित होने वाले मेले लोगों को कृषि, श्रमिक अधिकार, न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन जानकारी देंगे। साथ ही आचार्य सूरज राही जी की कथा लोगों में नैतिक और सामाजिक चेतना का संचार करेगी।
18 अगस्त की घोषणा के साथ ही यह तय हो जाएगा कि छत्तीसगढ़ गणराज्य में संगठन की बागडोर किसके हाथों में होगी। संगठन का दावा है कि यह प्रदेश अध्यक्ष केवल नेतृत्व की जिम्मेदारी ही नहीं निभाएंगे, बल्कि जनता और संविधान के बीच एक सेतु बनकर राज्य को नई दिशा देने का प्रयास करेंगे।
