
हुक्म संघ के नवम पट्टधर युग निर्माता परम पूज्य आचार्य प्रवर 1008 श्री रामलालजी म. सा.बेले-बेले के तपस्वी,बहुश्रुत वाचनाचार्य उपाध्याय प्रवर श्री राजेश मुनि जी म.सा.की आज्ञानुवर्ती शिष्या शासन दीपिका श्री प्रियंका श्रीजी म.सा. ठाणा-4 वर्षावास हेतु समता भवन गौरव पथ में सुखसाता पूर्वक विराज रहे है

11 जुलाई 2025
राजनांदगांव।11 श्री साधुमार्गी संघ द्वारा आयोजित चातुर्मास पर्व पर एक भावमयी आध्यात्मिक प्रवचन सभा शुरुआत सेवा भावी श्री दीपिका श्री जी महाराज द्वारा “संकल्प मेरे मन में हो ऐसा, अब मैं बनूंगा महावीर जैसा” भावपूर्ण भजन से की गई।
दीपिका श्री जी महाराज ने प्रवचन में महान साधक आचार्य जयमल जी महाराज के गुणों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने साधु-वृत्ति की ऊँचाइयों को छूते हुए “साधू वन वंदना” जैसे महान काव्य की रचना की। उन्होंने भगवान महावीर स्वामी और उनके प्रमुख शिष्य गौतम स्वामी के एक दृष्टांत का वर्णन करते हुए बताया कि जब गौतम स्वामी ने पूछा कि वंदना करने से क्या लाभ होता है, तब भगवान ने उत्तर दिया—”जो व्यक्ति श्रद्धा और समर्पण के साथ वंदना करता है, वह नीच गोत्र का क्षय कर उच्च गोत्र का बंध करता है।”
अपने प्रवचन में उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं को संदेश दिया कि साधु-साध्वी के प्रति जो अहोभाव उत्पन्न होता है, वही जीवन में आध्यात्मिक परिवर्तन की नींव रखता है। उन्होंने यह भी समझाया कि वंदना कब और किस विधि से की जाती है, इसका भी जीवन में विशेष महत्व है।

इसके पश्चात शासन दीपिका श्री प्रियंका श्री जी महाराज ने “आठो प्रहर ध्यान धरूं, प्रभु तू ही सहारा है…” भजनों के माध्यम से अपने प्रवचन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि हम प्रायः दूसरों की ओर देखते हैं, उनकी कमियों को खोजते हैं, परंतु हमें आत्मचिंतन की आवश्यकता है। चातुर्मास का यह पावन समय हमें स्वयं को समझने और सुधारने का अवसर देता है।
उन्होंने अपने प्रवचन में जैनत्व के गुणों को रेखांकित करते हुए भगवान महावीर स्वामी के वचनों को गहराई को समझाया। उन्होंने बताया कि महावीर स्वामी ने अपने 42 वर्षों के दीक्षा जीवन में केवल 14 वर्ष राजगृह नगरी में वर्षावास किया, क्योंकि वहाँ की श्रद्धा-भक्ति अद्वितीय थी। यही भाव उन्होंने श्रोताओं में जगाने का प्रयास किया कि – हम भी ऐसी ही श्रद्धा रखें कि गुरु कृपा सदैव बनी रहे।

सभा का संचालन साधुमार्गी संघ राजनंदगांव के अध्यक्ष श्री ललित जी चौरड़िया द्वारा किया गया। अंत में गुरुभक्ति से ओतप्रोत भजनों के साथ सभा का समापन हुआ और उपस्थित श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक प्रार्थना की – “गुरुवार स्वस्थ रहें, आल मस्त रहें, आठों याम प्रभु से यही प्रार्थना।”
