खैरागढ़ : ओबीसी महासभा ने सौंपा 23 सूत्रीय मांगों वाला ज्ञापन, आरक्षण और सामाजिक अधिकारों को लेकर जताई चिंता

खैरागढ़। ओबीसी महासभा ने प्रदेश में ओबीसी समाज के संरक्षण, संवर्धन और समान अधिकारों की मांग को लेकर सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर एक विस्तृत 23 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन महासभा के संभाग अध्यक्ष विप्लव साहू के नेतृत्व में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित शीर्ष पदाधिकारियों के नाम संबोधित किया गया।

ज्ञापन में ओबीसी वर्ग की राष्ट्रीय जनगणना कराने, आबादी के अनुपात में आरक्षण देने और क्रीमीलेयर जैसी असंवैधानिक शर्तों को समाप्त करने की पुरज़ोर मांग की गई। साथ ही 32 वर्षों से लंबित 27% ओबीसी आरक्षण को तत्काल लागू कर बैकलॉग नियुक्तियां शीघ्र भरने की मांग की गई।

इस मौके पर जिला अध्यक्ष किशोर निषाद, महासचिव भुवनेश्वर वर्मा, उपाध्यक्ष नीलेश यादव, गोलू साहू समेत अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। संभाग अध्यक्ष विप्लव साहू ने कहा कि मंडल कमीशन की सभी अनुशंसाएं पूरी तरह लागू की जाएं और ओबीसी आरक्षण को संविधान की नवमी अनुसूची में शामिल किया जाए।

महासभा ने शिक्षा विभाग के युक्तियुक्तीकरण के निर्णय का विरोध करते हुए इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की। साथ ही ओबीसी छात्रों को अनुसूचित जाति और जनजाति की तरह छात्रवृत्ति योजनाओं का समान लाभ देने की वकालत की।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए राज्य के सभी हायर सेकेंडरी स्कूलों में कृषि संकाय को अनिवार्य किया जाए। इसके अलावा ओबीसी प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को सरल करने और बजट में ओबीसी के लिए विशेष प्रावधान सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई।

महासभा ने राज्य में अलग से पिछड़ा वर्ग विभाग की स्थापना, एट्रोसिटी एक्ट का विस्तार ओबीसी तक करने और धान खरीदी की प्रक्रिया 1 नवंबर से शुरू करने का भी आग्रह किया। साथ ही आंध्र प्रदेश की तर्ज पर प्रशासनिक सेवाओं की भर्ती में साक्षात्कार की प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग की।

अन्य मांगों में वन भूमि पर निवास कर रहे ओबीसी परिवारों को पट्टा देने, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, बर्खास्त बीएड शिक्षकों का समायोजन, अंशकालिक स्वीपर को पूर्णकालिक करने तथा मध्यान्ह भोजन रसोइयों का मानदेय बढ़ाने जैसे जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे।

अंत में महासभा ने स्पष्ट किया कि ओबीसी समाज को उनका हक दिलाकर ही एक समतामूलक और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना संभव है। इस अवसर पर महासभा की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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